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राज्य

कोटा में बरगद के पेड़ से हनुमान प्रतिमा प्रकट, भक्तों की भीड़

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कोटा (Kota) शहर के किशोरपुरा (Kishorpura) क्षेत्र में रामद्वारा (Ramdwara) परिसर स्थित एक पुराने बरगद के पेड़ के तने से हनुमान जी (Lord Hanuman) की प्रतिमा प्रकट हुई है। इसे चमत्कार मानकर भक्त पूजा-अर्चना कर रहे हैं और अब इसी जगह पर मंदिर निर्माण की मांग जोर पकड़ रही है। सुरक्षा के लिए पुलिस (Police) भी तैनात की गई है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 कोटा के किशोरपुरा में बरगद के पेड़ से हनुमान जी की प्रतिमा निकली। भक्त इसे चमत्कार मानकर मंदिर निर्माण की मांग कर रहे हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार प्रतिमा बीसवीं सदी की हो सकती है। दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, पुलिस तैनात।
kota me bargad ke ped se hanuman pratima prakat bhakto ki bheed
पेड़ से निकली हनुमान प्रतिमा, मंदिर की मांग

कोटा: कोटा शहर के किशोरपुरा क्षेत्र में रामद्वारा परिसर स्थित एक पुराने बरगद के पेड़ के तने से हनुमान जी की प्रतिमा प्रकट हुई है। इसे चमत्कार मानकर भक्त पूजा-अर्चना कर रहे हैं और अब इसी जगह पर मंदिर निर्माण की मांग जोर पकड़ रही है। सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात की गई है।

यह घटना रविवार को सामने आई, जब रामद्वारा परिसर में कुछ बच्चे अलाव ताप रहे थे। वे ठंड से बचने के लिए पेड़ के तने के पास आग ताप रहे थे, तभी अचानक तने में आग लग गई।

आग बुझने के बाद बच्चों को पेड़ के अंदर एक अद्भुत प्रतिमा दिखाई दी। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना आसपास के लोगों और बड़ों को दी, जिसके बाद देखते ही देखते इलाके के निवासी वहां जमा हो गए।

सभी ने इसे हनुमान जी का साक्षात चमत्कार माना और बिना देर किए प्रतिमा की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। यह खबर जंगल की आग की तरह पूरे शहर में फैल गई।

चमत्कारिक प्रतिमा और भक्तों का सैलाब

प्रकट हुई यह प्रतिमा पत्थर की बनी है और इसकी ऊंचाई लगभग पांच फीट है। लोगों ने इसे उसी स्थान पर स्थापित कर दिया है, जहां यह प्रकट हुई थी।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। भक्तों का मानना है कि यह भगवान हनुमान का दैवीय संकेत है, जो कोटा शहर के लिए शुभ है।

बुधवार को सैकड़ों भक्तों ने इस पवित्र स्थान पर पूजा-अर्चना की, और दोपहर 12 बजे एक भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। यह दृश्य अत्यंत भक्तिमय और मनमोहक था।

अब रोजाना सुबह और शाम को महाआरती का क्रम जारी है, जिससे पूरा किशोरपुरा क्षेत्र भक्ति और आस्था के रंग में रंग गया है। आसपास फूल-मालाओं और प्रसाद की कई दुकानें भी खुल गई हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए, किसी भी अप्रिय घटना से बचने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी भक्त शांतिपूर्ण ढंग से दर्शन कर सकें।

मंदिर निर्माण की प्रबल मांग और जनभागीदारी

स्थानीय समिति का गठन और संकल्प

इस चमत्कारी घटना के बाद से ही स्थानीय भक्त इसी स्थान पर एक भव्य हनुमान मंदिर के निर्माण की प्रबल मांग कर रहे हैं। उनकी यह मांग अब जन आंदोलन का रूप ले चुकी है।

मंदिर निर्माण के लिए एक समिति का गठन भी शुरू हो गया है, जिसमें स्थानीय निवासी और प्रमुख लोग शामिल हैं। यह समिति मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया को देखेगी।

पूजा-अर्चना करा रहे पंडित सुरेंद्र शास्त्री ने इस घटना को कोटा शहर के लिए एक अत्यंत शुभ संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि भगवान की प्रतिमा का इस तरह अवतरित होना शहर के लिए सौभाग्य की बात है।

अब इस पवित्र स्थान पर नियमित रूप से सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह स्थान अब एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बन गया है।

समिति गठित होने के बाद, नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से मंदिर निर्माण की औपचारिक अनुमति मांगी जाएगी। भक्तों को उम्मीद है कि प्रशासन इस नेक कार्य में सहयोग करेगा।

हालांकि, भक्तों ने यह भी दृढ़ संकल्प लिया है कि यदि प्रशासन से अपेक्षित सहायता नहीं मिली, तो वे स्वयं धनराशि जुटाकर मंदिर का निर्माण करेंगे। उनका अटूट विश्वास है कि मंदिर का निर्माण इसी पवित्र स्थान पर ही होगा।

पुरातत्व विभाग की जांच: बीसवीं सदी की प्रतिमा

प्राकृतिक प्रक्रिया या दैवीय चमत्कार?

इस बीच, पुरातत्व विभाग की एक टीम ने भी इस प्रतिमा का गहनता से निरीक्षण किया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर, यह प्रतिमा लगभग 20वीं सदी की बताई जा रही है।

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने एक अनुमान व्यक्त किया है कि यह प्रतिमा संभवतः किसी पुराने धार्मिक स्थल से लाई गई होगी। समय के साथ, यह प्रतिमा बरगद के पेड़ के भीतर फंस गई या उसकी बढ़ती हुई तने की परतों में समा गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बरगद के पेड़ों में तना फैलने के साथ-साथ आसपास की वस्तुओं को अपने भीतर समेटने की एक प्राकृतिक क्षमता होती है। कई बार, पेड़ के पास रखी पत्थर या धातु की प्रतिमाएं धीरे-धीरे तने की बढ़ती मोटाई में समाहित हो जाती हैं।

प्रारंभिक आकलन के अनुसार, यही प्राकृतिक प्रक्रिया इस हनुमान प्रतिमा के पेड़ के तने से उभर आने का कारण बनी होगी। हालांकि, भक्तों के लिए यह आज भी एक अविश्वसनीय और दैवीय चमत्कार ही है, जो उनकी आस्था को और मजबूत कर रहा है।

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