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जालोर

क्षत्रिय समाज की एकजुटता और विकास की ओर बढ़ता कदम

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सम्मेलन में 13 देशों के क्षत्रिय प्रतिनिधियों के साथ देशभर के 158 से अधिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्य उद्देश्य समाज के बिखरे हुए संगठनों को एकजुट कर

HIGHLIGHTS

  1. 1 सम्मेलन में 13 देशों के क्षत्रिय प्रतिनिधियों के साथ देशभर के 158 से अधिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्य उद्देश्य समाज के बिखरे हुए संगठनों को एकजुट करना और समाज के विकास के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना है।
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उदयपुर, 26-27 अक्टूबर 2024 - लेकसिटी उदयपुर में आगामी 26 और 27 अक्टूबर को ऐतिहासिक वैश्विक क्षत्रिय महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

यह आयोजन मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में किया जाएगा।

सम्मेलन में 13 देशों के क्षत्रिय प्रतिनिधियों के साथ देशभर के 158 से अधिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्य उद्देश्य समाज के बिखरे हुए संगठनों को एकजुट करना और समाज के विकास के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना है।

विशिष्ट अतिथि और सम्मेलन का उद्दघाटन सत्र
सम्मेलन का उद्घाटन सत्र 26 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे आयोजित किया जाएगा, जिसमें मेवाड़ के महाराणा महेंद्र सिंह मेवाड़ और निरुपमा कंवर मेवाड़ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

उद्घाटन के बाद समाज के 50 से अधिक विशेषज्ञ और वक्ता अलग-अलग सत्रों में समाज के विकास और एकता से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

सात सत्रों में समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा
समारोह का पूरा कार्यक्रम सात सत्रों में विभाजित किया गया है, जिसमें समाज की सांस्कृतिक धरोहर से लेकर वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में क्षत्रिय समाज की भूमिका पर गहन चर्चा होगी।

उद्घाटन सत्र (26 अक्टूबर): निरुपमा कुमारी मेवाड़ द्वारा उद्घाटन किया जाएगा।
द्वितीय सत्र: क्षत्रिय समाज की सांस्कृतिक विरासत और उसके संरक्षण पर चर्चा।
तृतीय सत्र: वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में क्षत्रिय समाज की भूमिका।
चतुर्थ सत्र (27 अक्टूबर): क्षत्रिय इतिहास के विकृतिकरण पर रोकथाम के उपाय।
पंचम सत्र: आर्थिक, शैक्षणिक, और सामाजिक विकास में चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा।
षष्ठम सत्र: समस्त क्षत्रिय संगठनों के बीच आपसी समन्वय और कार्ययोजना।
समापन सत्र: कार्यक्रम के निष्कर्ष और भविष्य की योजनाओं पर विचार।

महासम्मेलन का आयोजन एवं विशेष सहयोग
इस सम्मेलन का आयोजन विभिन्न क्षत्रिय संगठनों के सहयोग से किया जा रहा है, जिसमें प्रमुख भूमिका मेवाड़ क्षत्रिय महासभा की है।

आयोजन के प्रमुख संयोजक जालम सिंह राठौड़ और प्रबंधन की जिम्मेदारी प्रोफेसर दरियाव सिंह चुण्डावत के कंधों पर है।

मार्गदर्शक मंडल में पूर्व विधायक रणधीर सिंह भीण्डर, अशोक सिंह मेतवाला, बालू सिंह कानावत, कुलपति प्रो. कर्नल शिवसिंह सारंगदेवांत, प्रताप सिंह झाला और गणपत सिंह नारेता शामिल हैं।

आयोजन का मीडिया प्रभार हेमेन्द्र सिंह दवाणा संभाल रहे हैं, जबकि डॉ. जयसिंह जोधा ने समन्वयक की भूमिका निभाई है।

अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी और सामाजिक एकता का प्रयास
यह महासम्मेलन देश-विदेश में कार्यरत क्षत्रिय संगठनों के प्रतिनिधियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

सम्मेलन में विश्व क्षत्रिय महासभा, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, करणी सेना, मेवाड़ क्षत्रिय महासभा, वागड़ क्षत्रिय महासभा, मारवाड़ राजपूत सभा, राजपूत सभा जयपुर, श्री क्षत्रिय युवक संघ और जोहर स्मृति संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे।

सम्मेलन में 400 से अधिक प्रतिभागियों के मेवाड़ के बाहर से आने और 800 से अधिक प्रतिभागियों के मेवाड़ क्षेत्र से भाग लेने की संभावना है।

इस महासम्मेलन का उद्देश्य समाज के विभिन्न संगठनों में सामंजस्य और सहयोग स्थापित करना, समाज के आर्थिक एवं शैक्षिक उत्थान पर चर्चा करना और क्षत्रिय समाज के समग्र विकास के लिए ठोस कार्ययोजना बनाना है।

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