बाड़मेर: वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री के.के. विश्नोई (K.K. Bishnoi) ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को रिफाइनरी पर राजनीति न करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि यह युवाओं और देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। विश्नोई ने जनप्रतिनिधियों को बचकानी हरकतों से बचने की सलाह भी दी।
मंत्री के.के. विश्नोई ने यह बयान बालोतरा शहर के समदड़ी रोड स्थित संत श्री राजाराम छात्रावास में नवनिर्मित राजेश्वर भगवान के मंदिर के तीन दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान दिया। इस समारोह में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मंत्री जोगाराम पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि व संत शामिल हुए। कार्यक्रम में ध्वजारोहण, कलश स्थापना और वैदिक मंत्रोच्चार से मूर्ति स्थापना की गई।
रिफाइनरी पर राजनीति अनुचित
विश्नोई ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा रिफाइनरी शुरू करने पर किए गए ट्वीट को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण विषय पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह देश के युवाओं और भविष्य से जुड़ा विषय है।
उन्होंने बताया कि रिफाइनरी परियोजना में एक लाख करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है, जो प्रदेश के विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण है। विश्नोई ने इस मुद्दे को राजनीतिक दांव-पेंच से ऊपर रखने की अपील की।
कांग्रेस ने सिर्फ नींव का पत्थर लगाया
मंत्री विश्नोई ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय रिफाइनरी के नाम पर सिर्फ नींव का पत्थर लगाया गया, जबकि पिछली वसुंधरा राजे सरकार ने इसे आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के रखे पत्थर को कुछ लोग उठा ही ले जाते, उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शुभारंभ किया। मोदी सरकार ने अल्प समय में ही अति आधुनिक रिफाइनरी बनाकर प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। यह अमृतसर, पचपदरा और जामनगर से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है।
जनप्रतिनिधियों को गंभीरता बरतने की सलाह
गुड़ामालानी एसडीएम द्वारा बीजेपी प्रधान से इस्तीफा मांगने के मामले पर मंत्री विश्नोई ने कहा कि वे इस बारे में जानकारी लेकर जवाब देंगे। हालांकि, उन्होंने साथ ही जनप्रतिनिधियों को सलाह दी कि कई बार वे स्वयं बचपना कर बैठते हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि शासन धीर-गंभीरता से चलाया जाता है। दरअसल, गुड़ामालानी एसडीएम केशव कुमार मीना और भाजपा प्रधान बिजलाराम चौहान के बीच शुक्रवार को बहस हो गई थी, जिसमें प्रधान ने अपनी पंचायत समिति में सुनवाई न होने का आरोप लगाया था, जिस पर एसडीएम ने उन्हें इस्तीफा देने को कहा था।
धार्मिक महोत्सव का समापन
तीन दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के बीच ही प्रदेश की राजनीति और जनप्रतिनिधियों के आचरण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।