प्रदेशाध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) की ओर से उन्हें सख्त निर्देश मिल हैं कि अब बसपा में गुढ़ा को कभी भी वापस नहीं लिया जाए।
गुढ़ा दो बार पार्टी के साथ विश्वासघात कर चुके हैं। उनकी वजह से पार्टी को परेशानी का सामना करना पड़ा।
हालांकि, गहलोत सरकार के खिलाफ लगातार आवाज उठाने के बाद से विपक्षी भाजपा उन्हें समर्थन देती दिख रही है, लेकिन गुढ़ा ने भाजपा में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है।
बसपा से जीते चुनाव, कांग्रेस से मिलाया हाथ
आपको बता दें कि राजेंद्र गुढ़ा वर्तमान में झुंझुनूं जिले की उदयपुरवाटी विधानसभा सीट से विधायक हैं।
वे 2008 में पहली बार बसपा से चुनाव लड़कर जीते थे। उसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी के विधायकों के साथ गहलोत सरकार को समर्थन दिया था।
जिसके जवाब में सीएम गहलोत ने भी उन्हें राज्यमंत्री बनाया था। साल 2018 में भी राजेंद्र गुढ़ा फिर चुनाव जीते और गहलोत सरकार को समर्थन दिया।
इसके एक साल बाद ही सितंबर 2019 में गुढ़ा समेत बसपा के 6 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए। जिसके बाद गहलोत ने गुढ़ा को दूसरी बार मंत्री बनाया था।
औवेसी से की थी मुलाकात
आपको बताना चाहेंगे कि पिछले दिनों ही गहलोत के मंत्री रहे राजेंद्र गुढ़ा एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के साथ दिखाई दिए थे।
दरअसल, असदुद्दीन ओवैसी राजस्थान के चुनावी रण में एक जनसभा को संबोधित करने के लिए जयपुर आए थे।
उसी दौरान राजेंद्र गुढ़ा अचानक से औवेसी से मिलने उनके होटल पहुंचे थे और उनसे निजी मुलाकात कर सभी को चौंका दिया था।
दोनों की इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में गुढ़ा के औवेसी की पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की खबरें भी उड़ी थी।