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गहलोत सरकार के मंत्री ने करवाया था आत्मसमर्पण, पुलिस सुरक्षा में गैंगस्टर कुलदीपसिंह जघीना की हत्या

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आरोपी गैंगस्टर कुलदीप जघीना की बुधवार को राजस्थान के भरतपुर में अपराधियों ने पुलिस हिरासत में गोली मारकर हत्या कर दी जाट समाज के लोगों के आह्वान पर डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेंद्र सिंह ने  उसका  थाने बुलाकर आत्मसमर्पण करवाया था। कुलदीप के खिलाफ जयपुर के ज्योति नगर थाना, सेवर व कोतवाली थाने में एक-एक, मथुरा गेट थाने में

HIGHLIGHTS

  1. 1 आरोपी गैंगस्टर कुलदीप जघीना की बुधवार को राजस्थान के भरतपुर में अपराधियों ने पुलिस हिरासत में गोली मारकर हत्या कर दी
  2. 2 जाट समाज के लोगों के आह्वान पर डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेंद्र सिंह ने  उसका  थाने बुलाकर आत्मसमर्पण करवाया था। कुलदीप के खिलाफ जयपुर के ज्योति नगर थाना, सेवर व कोतवाली थाने में एक-एक, मथुरा गेट थाने में छह, उद्योगनगर थाने में चार मुकदमे दर्ज हैं।
minister of gehlot government had surrendered gangster kuldeep singh jaghina was killed in police protection
crime scene

जयपुर | शांत प्रदेशों में शुमार राजस्थान अब गैंगस्टरों की शरणगाह बन गया है। पुलिस सुरक्षा  में दिन दहाड़े अपराधियों ने एक और बड़ी वारदात को अंजाम देते हुए एक गैंगस्टर की हत्या कर दी। \

पांच साल पहले एनकाउंटर के डर से मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने जिस कुलदीपसिंह जघीना का पुलिस के सामने समर्पण करवाया था। उसकी भरतपुर में दिन दहाड़े गो​लियों से भूनकर हत्या कर दी गई है। कुलदीप को भय था कि भरतपुर पुलिस उसकी हत्या कर सकती है।

जाट समाज के लोगों के आह्वान पर डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेंद्र सिंह ने  उसका  थाने बुलाकर आत्मसमर्पण करवाया था। कुलदीप के खिलाफ जयपुर के ज्योति नगर थाना, सेवर व कोतवाली थाने में एक-एक, मथुरा गेट थाने में छह, उद्योगनगर थाने में चार मुकदमे दर्ज हैं।

आरोपी गैंगस्टर कुलदीप जघीना की बुधवार को राजस्थान के भरतपुर में अपराधियों ने पुलिस हिरासत में गोली मारकर हत्या कर दी। अपराधियों ने पुलिस की आंखों में मिर्ची पाउडर झोंक दिया और स्थिति का फायदा उठाते हुए गैंगस्टर को गोली मार दी।

गोलीबारी तब हुई जब पुलिस गैंगस्टर को जयपुर जेल से भरतपुर कोर्ट ले जा रही थी। मृतक कुलदीप हत्या और रंगदारी समेत कई मामलों में संलिप्त था और जेल में बंद था।

हादसा जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर अमोली टोल प्लाजा के पास हुआ. यह वारदात जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर हुई। 

इसलिए किया था आत्मसमर्पण
पुलिस ने कुलदीप की संपत्ति की कुर्की कराने के लिए नोटिस जारी कराया था। इसमें आत्मसमर्पण नहीं करने पर सुनवाई होनी थी। अगर कुलदीप समर्पण नहीं करता तो पुलिस उसके हिस्से की प्रोपर्टी कुर्क कर देती।

पुलिस के दबाव के कारण कुलदीप को डर था कि अगर अब कुछ भी हुआ तो पुलिस कभी भी एनकाउंटर कर देगी। कुलदीप ने लगातार अपनी जान को खतरा बताया था बावजूद इसके उसे पुलिस सुरक्षा में ही मार दिया गया है।

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