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नरेश मीणा पर हमला: 'प्लानिंग के साथ किया गया था'

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत 52

कोटा/बारां (Kota/Baran) में नरेश मीणा (Naresh Meena) पर हमला हुआ, जिसमें उनकी गाड़ी पर लाठियों से हमला कर शीशे तोड़ दिए गए। मीणा ने आरोप लगाया कि हमलावर पिस्टल लेकर आए थे और यह हमला चुनावी रंजिश के चलते पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था। उन्होंने पुलिस प्रशासन (Police Administration) और हाड़ौती (Hadoti) के चार प्रमुख नेताओं को जिम्मेदार ठहराया।

HIGHLIGHTS

  1. 1 बारां में नरेश मीणा की गाड़ी पर लाठियों से हमला, शीशे तोड़े गए। नरेश मीणा ने हमले को चुनावी रंजिश और सुनियोजित साजिश बताया। हमलावरों के पास पिस्टल होने का आरोप, पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप। मीणा ने पुलिस प्रशासन और हाड़ौती के चार बड़े नेताओं को ठहराया जिम्मेदार।
naresh meena par hamla planning ke sath kiya gaya tha
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बारां: कोटा/बारां (Kota/Baran) में नरेश मीणा (Naresh Meena) पर हमला हुआ, जिसमें उनकी गाड़ी पर लाठियों से हमला कर शीशे तोड़ दिए गए। मीणा ने आरोप लगाया कि हमलावर पिस्टल लेकर आए थे और यह हमला चुनावी रंजिश के चलते पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था। उन्होंने पुलिस प्रशासन (Police Administration) और हाड़ौती (Hadoti) के चार प्रमुख नेताओं को जिम्मेदार ठहराया।

शनिवार शाम बारां में नरेश मीणा पर हमला हुआ, जिसके बाद उन्होंने अपने समर्थकों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचकर धरना दिया। उन्होंने भूख हड़ताल की धमकी भी दी, लेकिन पुलिस अधिकारियों से बातचीत के बाद धरना समाप्त कर दिया।

हमले की पूरी योजना थी: नरेश मीणा

भास्कर से बातचीत में नरेश मीणा ने बताया कि उन पर यह हमला पूरी योजना के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान से ही दुश्मनी चल रही है और उन्हें मारने की साजिश रची जा रही है।

मीणा ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो इसके लिए पुलिस प्रशासन और हाड़ौती के चारों प्रमुख नेता जिम्मेदार होंगे। उन्होंने इस घटना को राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम बताया।

घटनाक्रम का विस्तृत ब्यौरा

नरेश मीणा ने बताया कि वे एक धार्मिक कार्यक्रम में जा रहे थे और रास्ते में आखेड़ी गांव में एक बैठक में शामिल हुए। वापसी के दौरान अचानक उनके मकान के सामने कुछ लोग आए और उन पर हमला कर दिया।

हमलावरों में से एक के पास पिस्टल भी थी, हालांकि उसने लाठी से ही हमला किया। मीणा ने बताया कि वे वहीं बैठ गए और पुलिस का इंतजार किया।

कुछ देर बाद उनके समर्थक इकट्ठा होने लगे। इसके बाद आरोपियों के घर के पास उनकी गाड़ी में आग लगा दी गई और तोड़फोड़ की गई, जिसका आरोप मीणा ने खुद हमलावरों पर लगाया।

पुलिस मौके पर पहुंची और कुछ हमलावरों को हिरासत में लिया। मीणा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण में गुंडागर्दी करने वालों पर पुलिस अक्सर कार्रवाई नहीं करती और उन्हें थाने लाकर छोड़ देती है।

इसी डर से वे एसपी कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें सख्त कार्रवाई का आश्वासन मिला, जिसके बाद उन्होंने धरना समाप्त कर दिया।

बारां में बड़े आंदोलन की चेतावनी

नरेश मीणा ने घोषणा की कि वे जल्द ही बारां में सट्टा, जुआ, हथियारों की खेप और बढ़ते अपराधियों के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने किसानों के मुद्दों और थर्मल प्लांट पर रोजगार के नाम पर ठेकेदारों द्वारा पैसे काटने जैसे मुद्दों को भी उठाया।

गुस्साए नरेश मीणा समर्थकों ने पूर्व सरपंच के घर के बाहर खड़ी कार में आग लगा दी थी। इस घटना के बाद गांव में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

हमले में 10-12 हमलावर शामिल

हमले के समय की स्थिति बताते हुए नरेश मीणा ने कहा कि वे कार की फ्रंट सीट पर थे और 10 से 12 हमलावर थे। एक हमलावर ने बिल्कुल उनके सामने से हमला किया।

गाड़ी थोड़ी स्पीड में थी, इसलिए उसने ड्राइवर सीट पर लाठी से हमला किया, जिससे शीशे टूट गए। मीणा ने बताया कि इसके बाद वे वहां से करीब सौ मीटर दूर जाकर बैठ गए और सोशल मीडिया पर हमले की जानकारी दी।

उन्होंने दावा किया कि हमले में ज्यादातर बाहर के लोग शामिल थे और यह सब प्लानिंग के तहत किया गया था।

रंजिश और आरोपी कौन?

मीणा के अनुसार, यह हमला प्रमोद जैन भाया के खास लोगों द्वारा किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाया के संरक्षण में पहले भी गोलियां चलाई गई हैं और हत्याएं भी हुई हैं, लेकिन हर बार वे बचते रहे हैं।

हमला करने वालों में तोलाराम, उसके बेटे और उनके गुंडे दोस्त शामिल थे। मीणा ने बताया कि अंता चुनाव के समय उनके कार्यकर्ता पोस्टर लगा रहे थे, तब इन लोगों ने मारपीट की थी।

मीणा ने इसका विरोध किया और तब से ये लोग उनसे रंजिश पाले हुए थे। उन्होंने आशंका जताई कि आगे भी उन पर हमले हो सकते हैं।

मीणा ने कहा कि वे नेताओं से जिस तरह लड़ रहे हैं, उन्हें यही चिंता है कि नरेश मीणा को कैसे रोका जाए, क्योंकि वे जेल जाने से नहीं डरते। अब ये लोग उन पर हमले कराकर उन्हें रोकना चाहते हैं।

पुलिस प्रशासन से बातचीत और आश्वासन

पुलिस प्रशासन से बातचीत के बारे में मीणा ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों को बताया है कि उन पर हमले के अलावा भाया के इर्द-गिर्द कई बदमाश लोग खुले घूम रहे हैं। उन्होंने पुलिस और इन लोगों की मिलीभगत का आरोप लगाया।

मीणा ने स्पष्ट किया कि यदि उनके साथ इस तरह की कोई घटना होती है, तो वे पुलिस प्रशासन के साथ-साथ प्रमोद जैन भाया और ओम बिरला को भी दोषी मानेंगे।

'काला सांप' और भ्रष्टाचार पर बयान

खुद को 'काला सांप' कहने के पीछे का मतलब बताते हुए मीणा ने कहा कि राजनीति में कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं ने उन्हें चुनाव हराने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जब उनका समय आएगा, तो वे भी 'जैसे को तैसा' करेंगे।

तीन विधायकों के भ्रष्टाचार के खेल में कैमरे में कैद होने पर मीणा ने कहा कि उन्हें तुरंत सस्पेंड कर जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे जनता में यह संदेश जाएगा कि नेता गलत करेंगे तो जेल जाएंगे।

मीणा ने दावा किया कि तीन ही नहीं, नब्बे फीसदी नेता ऐसे ही हैं, सांसद तक अपनी निधि से काम करवाने के पैसे लेते हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार फैला हुआ है और सरपंच तक इसमें शामिल हैं।

अंता चुनाव और हार का विश्लेषण

अंता से चुनाव लड़ने और नतीजों के खिलाफ रहने के कारणों पर मीणा ने कहा कि नतीजे उनके खिलाफ नहीं थे। वे अचानक से एक अनजान जगह से चुनाव लड़ रहे थे, जहां उन्हें लोग नहीं जानते थे।

इसके बावजूद जनता ने उनकी आवाज सुनी और उन्हें 55 हजार वोट दिए, जबकि लोगों के दरवाजे पर 20-20 हजार रुपये रखे गए थे। उन्होंने जनता का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने हार नहीं मानी है।

मीणा ने आरोप लगाया कि सामने वाला पैसे के दम पर जीत गया और लोग भी पैसे के लोभ में आ गए, क्योंकि वहां गरीबी है। उन्होंने कहा कि नरेगा में काम करने वाले लोगों को दो वक्त की रोटी नहीं मिल रही है, तो वे क्या करेंगे?

उन्होंने भाया पर भ्रष्टाचार का खूब पैसा होने का आरोप लगाया। मीणा ने जनता से कहा था कि पैसे ले लो, लेकिन उसे वोट मत देना, क्योंकि ये ढाई साल जनता के पैसों की ही वसूली करेंगे।

हालांकि, अब लोगों में जागरूकता आ रही है और हार के बाद भी वे गांव-गांव जा रहे हैं, जहां लोगों का हुजूम आता है, जबकि प्रमोद जैन भाया के तो दो-चार आदमी भी नजर नहीं आते।

व्यक्तिगत नहीं, गठजोड़ की राजनीति से लड़ाई

क्या उनकी लड़ाई प्रमोद जैन भाया से ही है, इस सवाल पर मीणा ने स्पष्ट किया कि उनकी भाया से कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। उनकी लड़ाई हाड़ौती के चारों धन्नासेठों – ओम बिरला, प्रमोद भाया, शांति धारीवाल और प्रताप सिंघवी – से है, जो गठजोड़ की राजनीति करते हैं।

मीणा ने आरोप लगाया कि ये लोग पार्टी को धोखा दे रहे हैं और कार्यकर्ताओं को भी धोखा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी के अपने ही कार्यकर्ताओं की मेहनत पर पानी फेरते हैं और कांग्रेस की मदद करवाते हैं, वहीं कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की मेहनत पर पानी फेरकर बीजेपी की मदद करते हैं।

उन्होंने कहा कि इससे कार्यकर्ताओं की आत्मा दुखती है। मीणा ने सवाल उठाया कि ईडी और सीबीआई भाया के यहां जांच के लिए क्यों नहीं आती, क्योंकि उन्हें बड़े पदों पर बैठे नेताओं का संरक्षण मिला हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि वसुंधरा राजे ही हैं, जो प्रमोद को इलाके में घुसने नहीं दे रही हैं, नहीं तो यह तो चुनाव जीतने के बाद अमित शाह से मिलकर आया है और अगले लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ज्वाइन कर ले, यह कोई बड़ी बात नहीं।

आक्रामक चेहरा और शांतिपूर्ण रवैया

नरेश मीणा के आक्रामक चेहरे और चुनाव के बाद लहजे में आई नरमी पर सवाल पर उन्होंने कहा, "आज देखा नहीं आपने। मैं कितनी नरमी के साथ था। मैंने शांति से मामला हैंडल किया है।"

उन्होंने अपने समर्थकों को भी समझाया कि सामने वाले ने गलती की है और उन पर पुलिस कार्रवाई करेगी। मीणा ने इस बात से इनकार किया कि जो गाड़ी जली है, वह उनके कार्यकर्ताओं ने जलाई है।

उन्होंने कहा, "हम तो उसके घर के पास ही नहीं गए। खुद ने ही तोड़फोड़ कर ली।" उन्होंने आरोप लगाया कि ये वही प्रमोद जैन भाया के लोग हैं, जिसने उर्मिला पर हमला करवा लिया और खुद की गाड़ी पर गोली चला ली।

मीणा ने कहा, "मैं अकेला था, हमला हुआ, समर्थक आए। इनका तो यही है कि निर्दोष को फंसा दो।" उन्होंने अटरू सीओ से सिंघवी के पीएसओ शंकर विश्नोई पर एनडीपीएस के मुकदमे की जांच में बार-बार बदलाव होने के बारे में भी पता करने का निवेदन किया।

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