हालांकि भंवरी देवी कांड एक सामाजिक अपराध और दो नेताओं की मिलीभगत था। परन्तु यहां तो आरोप सरकार पर ही है।
राज्यसभा सांसद और बीजेपी के वरिष्ठ नेता किरोड़ीलाल मीणा ने जयपुर में प्रेस वार्ता करके पेपर लीक करने वालों के संबंध राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय से होने के आरोप लगाए हैं।
मीणा ने कहा है कि हैकर महेन्द्र विश्नोई की मदद से मास्टरमाइंड सुरेश ढाका ने न केवल आरपीएससी समेत प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर आउट किए। बल्कि अशोक गहलोत गुट के सुमित भगासरा को जिताने के लिए यूथ कांग्रेस का पूरा चुनावी सिस्टम ही हैक कर लिया था।
भगासरा के सामने सचिन पायलट के समर्थक मुकेश भाकर थे और प्रभावी वोटिंग के बावजूद मुकेश आनलाइन चुनाव में हार गए थे।
बाद में कांग्रेस हाईकमान ने चुनावों को रद्द कर दिया गया था। ऐसे में राजस्थान में कांग्रेस हाईकमान के साथ पहला खेल सचिन पायलट गुट ने किया था। यह बात निराधार साबित होती है।
किरोड़ी मीणा की मानें तो कांग्रेस पार्टी के साथ पहला खेल करने वाला सुमित भगासरा का गुट था, जो सीएम अशोक गहलोत का करीबी माना जाता है।
मीणा का कहना है कि सुरेश ढाका के सीएमओ से संबंध रहे हैं और पूरा मामला अब सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए।
मीणा का आरोप है कि सुरेश ढाका की गर्लफ्रेंड एक बड़ी नेता है और वह नेपाल भागने की फिराक में है। मीणा ने गहलोत सरकार के मंत्री सुखराम बिश्नोई के पीए मनोहर के भी इस पेपर लीक काण्ड में शामिल होने के आरोप लगाए।
मीणा ने कहा कि राजस्थान में युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए हरियाणा की ब्लैक लिस्टेड कंप्यूटर कंपनियों की मदद ली गई है। उन्होंने एसओजी के अफसरों की मिलीभगत के भी आरोप लगाए।
मीणा का कहना है कि अशोक गहलोत सरकार में यह काम संगठित रूप से हो रहा है और इसमें पांच—छह विधायक भी शामिल है। यही नहीं एसओजी के अफसर मास्टरमाइंड सुरेश की प्रेमिका के संपर्क में हैं और एक महिला को तो पैंतीस लाख रुपए लेकर छोड़ा भी है।
खैर देखना यह है कि मारवाड़ के गांधी और जननायक की उपाधि से नवाजे जा रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री क्या वाकई इस मामले में युवाओं का भविष्य बचाएंगे या अपने नेताओं की कलई।