लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (3) के तहत, अगर संसद सदस्य को किसी भी अपराध में दोषी करार दिया जाता है, और कम से कम दो साल कैद की सजा सुनाई जाती है तो वह संसद की सदस्यता ले लिए अयोग्य माना जाता है।
ऐसे में निर्वाचन आयोग भी इस सीट पर चुनाव की घोषणा कर सकता है।
जनप्रतिनिधि कानून के मुताबिक, दो साल या उससे अधिक समय के लिए कारावास की सजा होने पर उस व्यक्ति को ‘दोषसिद्धि की तारीख से’ अयोग्य घोषित माना जाता है।
इसी के साथ वह सजा पूरी होने के बाद भी 6 साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाएगा।
ऐसे में अगर अपीलीय अदालत राहुल गांधी दोष मुक्त और 2 साल की सजा से बच जाते हैं, तो वह लोकसभा सदस्यता के लिए अयोग्य नहीं हो सकेंगे।'
इसी के साथ अदालत ने उनपर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
हालांकि सुनवाई के दौरान ही राहुक को कोर्ट ने जमानत देते हुए 30 का समय भी दिया था ताकि वे अपने बचाव में अर्जी लगा सके।
साल 2019 का है पूरा मामला
आपको बता दें कि, राहुल गांधी ने साल 2019 के आम चुनाव से पहले कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल को आयोजित एक जनसभा में कहा था कि, सभी चोरों का समान उपनाम मोदी ही कैसे है। तब उन्होंने ने कुछ लोगों के नाम भी लिए थे। जिसमें उन्होंने नीरव मोदी, ललित मोदी और अन्य का नाम लेते हुए कहा था, कैसे सभी चोरों का सरनेम मोदी है?
जनसभा में दी गई राहुल गांधी की इस टिप्पणी के खिलाफ भाजपा नेताओं और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने शिकायत दर्ज कराई थी।