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राजनीति

राहुल गांधी बोले मोदी चला रहे वन मैन शो, खड़गे ने कहा गांधी सरनेम से है सरकार को परेशानी

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कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने मनरेगा का नाम बदलने और केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया।

HIGHLIGHTS

  1. 1 राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर वन मैन शो चलाने और अरबपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार को गांधी सरनेम से दिक्कत है इसलिए मनरेगा का नाम बदला गया। कांग्रेस ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ एक साजिश करार दिया। मनरेगा की नई फंडिंग व्यवस्था और नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस देशव्यापी आंदोलन करेगी।
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नई दिल्ली | दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक के बाद राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखे हमले किए हैं। बैठक के मुख्य केंद्र में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण किया जाना रहा। कांग्रेस ने इस फैसले को सीधे तौर पर ग्रामीण गरीबों के अधिकारों पर हमला बताया है और घोषणा की है कि पार्टी इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी। यह बैठक हाल के विधानसभा चुनावों और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राहुल गांधी के मोदी सरकार पर गंभीर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में वन मैन शो चल रहा है जिसमें प्रधानमंत्री बिना किसी कैबिनेट सलाह या राज्यों के साथ मशविरे के बड़े फैसले ले रहे हैं। राहुल गांधी के अनुसार इस कार्यशैली का सीधा फायदा देश के केवल दो तीन बड़े अरबपतियों को मिल रहा है जबकि ग्रामीण इलाकों की आम जनता को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना के स्वरूप को बदलना गरीबों की रोजी रोटी पर प्रहार है।राहुल गांधी ने आगे कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं थी बल्कि यह एक अधिकार आधारित अवधारणा थी। इसके माध्यम से देश के करोड़ों गरीब लोगों को न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी मिलती थी। उन्होंने चेतावनी दी कि मनरेगा के ढांचे में बदलाव करना सीधे तौर पर गरीबों के कानूनी अधिकारों पर आक्रमण है। राहुल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार राज्यों से वित्तीय शक्तियां छीन रही है और यह सत्ता के केंद्रीकरण का एक खतरनाक उदाहरण है। उनके अनुसार यह फैसला सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से लिया गया है जो संघीय ढांचे के खिलाफ है।

मल्लिकार्जुन खड़गे का गांधी सरनेम पर बयान

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को गांधी सरनेम से विशेष दिक्कत है। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि मनरेगा के साथ महात्मा गांधी का नाम जुड़ा हुआ था इसलिए सरकार ने इसका नाम बदलने का फैसला किया। खड़गे ने इसे राष्ट्रपिता का अपमान करार देते हुए कहा कि सोनिया गांधी और डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार ने इस योजना को कानून बनाकर गरीबों को हक दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल गांधी परिवार ही नहीं बल्कि महात्मा गांधी के नाम को भी इतिहास से मिटाना चाहती है।खड़गे ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा करती है और दूसरी तरफ गरीबों के लिए चलाई जा रही मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर देश के पास पर्याप्त धन है तो मजदूरों को देने के लिए पैसे क्यों नहीं हैं। खड़गे ने स्पष्ट किया कि यह सरकार केवल अमीरों के साथ खड़ी है और गरीबों को दबाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अंबानी और अडाणी जैसे लोग देश का पैसा डुबो रहे हैं लेकिन सरकार मजदूरों के अधिकार छीन रही है।

मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों पर साजिश

बैठक के दौरान खड़गे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों को कम करने की एक सुनियोजित साजिश बताया। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे घर घर जाकर यह सुनिश्चित करें कि गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से न हटाए जाएं। खड़गे के अनुसार यह प्रक्रिया विपक्ष के समर्थकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है और पार्टी को इसके प्रति सतर्क रहना होगा।

नए कानून की चुनौतियां और राज्यों पर वित्तीय बोझ

संसद के शीतकालीन सत्र में पारित नए कानून के अनुसार अब केंद्र और राज्यों को योजना की फंडिंग साठ और चालीस के अनुपात में साझा करनी होगी। कांग्रेस ने इस प्रावधान का कड़ा विरोध किया है। पार्टी का मानना है कि इससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और योजना का क्रियान्वयन प्रभावित होगा। पहले यह केंद्र की एक प्रमुख योजना थी लेकिन अब इसे राज्यों के साथ साझा जिम्मेदारी बना दिया गया है जिससे इसकी प्रभावशीलता कम हो सकती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने का प्रयास है।

सांप्रदायिक सौहार्द और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे

बैठक में केवल घरेलू मुद्दों पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मल्लिकार्जुन खड़गे ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। साथ ही उन्होंने देश के भीतर क्रिसमस समारोहों पर हो रहे हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंच रहा है और सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ रहा है। बैठक में शशि थरूर सहित कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी हिस्सा लिया और पार्टी की भविष्य की रणनीति पर विचार विमर्श किया।कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मनरेगा के मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी। पार्टी का मानना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली इस योजना के साथ छेड़छाड़ करना सरकार की एक बड़ी भूल साबित होगी। आने वाले दिनों में कांग्रेस इस मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रही है ताकि सरकार को इस फैसले को वापस लेने के लिए मजबूर किया जा सके। बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी श्रद्धांजलि दी गई और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के योगदान को याद किया गया।

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