जयपुर | राजस्थान विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान आवास विहीन परिवारों के मुद्दे पर जबरदस्त राजनीतिक ड्रामा और तीखी बहस देखने को मिली। सदन में बहस का स्तर इतना गहरा गया कि मामला होमलेस, भूमिहीन और बेघर जैसी परिभाषाओं के भाषाई जाल में उलझ गया। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा को विपक्ष के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को हस्तक्षेप करना पड़ा।
भरतपुर विधायक के सवालों पर घिरे मंत्री
विवाद की शुरुआत तब हुई जब भरतपुर से विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में आवास विहीन परिवारों की स्थिति पर सवाल दागा। डॉ. गर्ग ने पूछा कि क्या भरतपुर में आवास नीति के तहत जिला कलेक्टर ने कोई बैठक आयोजित की है? उन्होंने स्पष्ट रूप से जानना चाहा कि क्या मौजूदा नीति के अनुसार आवास विहीन परिवारों का सर्वे कराने और इसके लिए कमेटी बनाने का कोई प्रावधान है। गर्ग का आरोप था कि मंत्री जानबूझकर मूल प्रश्न का उत्तर देने के बजाय उसे प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़कर सदन को गुमराह कर रहे हैं।