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राजनीति

राजस्थान विधानसभा में आवास विहीन के मुद्दे पर सियासी संग्राम, मंत्री खर्रा ने दी बेघर और भूमिहीन की नई परिभाषा

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राजस्थान विधानसभा में आवास विहीन परिवारों के सर्वे और नीति पर भारी हंगामा हुआ, जहाँ मंत्री और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को मिली।

HIGHLIGHTS

  1. 1 भरतपुर विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने आवास विहीन परिवारों के सर्वे पर उठाए सवाल। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सदन में भूमिहीन, आवास विहीन और बेघर के बीच बताया अंतर। संसदीय कार्य मंत्री और उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने किया सरकार का बचाव। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को बताया कन्फ्यूज, कहा- सदन में वकील की जरूरत।
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जयपुर | राजस्थान विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान आवास विहीन परिवारों के मुद्दे पर जबरदस्त राजनीतिक ड्रामा और तीखी बहस देखने को मिली। सदन में बहस का स्तर इतना गहरा गया कि मामला होमलेस, भूमिहीन और बेघर जैसी परिभाषाओं के भाषाई जाल में उलझ गया। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा को विपक्ष के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को हस्तक्षेप करना पड़ा।

भरतपुर विधायक के सवालों पर घिरे मंत्री

विवाद की शुरुआत तब हुई जब भरतपुर से विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में आवास विहीन परिवारों की स्थिति पर सवाल दागा। डॉ. गर्ग ने पूछा कि क्या भरतपुर में आवास नीति के तहत जिला कलेक्टर ने कोई बैठक आयोजित की है? उन्होंने स्पष्ट रूप से जानना चाहा कि क्या मौजूदा नीति के अनुसार आवास विहीन परिवारों का सर्वे कराने और इसके लिए कमेटी बनाने का कोई प्रावधान है। गर्ग का आरोप था कि मंत्री जानबूझकर मूल प्रश्न का उत्तर देने के बजाय उसे प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़कर सदन को गुमराह कर रहे हैं।

मंत्री खर्रा ने पेश किए आंकड़े

विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है। उन्होंने सदन में आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि साल 2016-17 से अब तक कुल 302 पात्र व्यक्तियों को आवास का लाभ दिया जा चुका है। पिछले दो वर्षों के आंकड़ों के अनुसार 54 पात्र परिवार चिन्हित किए गए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि PMAY शहरी 2.0 के तहत ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया होती है और निकाय द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद ही केंद्र सरकार से स्वीकृति प्राप्त होती है।

सदन में जमकर हुई नोंकझोंक

बहस के दौरान सदन में माहौल तब और गरमा गया जब संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और सुभाष गर्ग के बीच सीधी झड़प हुई। गर्ग ने तर्क दिया कि उनके प्रश्न का पहला खंड सामान्य आवास विहीन परिवारों के बारे में है, जबकि मंत्री दूसरे खंड यानी PMAY का हवाला दे रहे हैं। हंगामा बढ़ते देख उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने मोर्चा संभाला और कहा कि मंत्री जी पूरी तैयारी के साथ आए हैं और यह कोई गुगली नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तत्पर है।

परिभाषाओं का नया विवाद

जब कांग्रेस विधायकों ने मंत्री के जवाब का विरोध किया, तो झाबर सिंह खर्रा ने उग्र होते हुए कहा कि विपक्ष को नियमों की सही जानकारी नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के हस्तक्षेप के बाद मंत्री ने सदन में तीन महत्वपूर्ण शब्दों की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि भूमिहीन वह है जिसके पास जमीन ही नहीं है, आवास विहीन वह है जिसके पास प्लॉट तो है लेकिन मकान नहीं, और बेघर वह है जिसका कोई ठौर-ठिकाना नहीं है।

विपक्ष का कड़ा प्रहार

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस पूरी बहस पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह से भ्रमित है। उन्होंने कहा कि सदन की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अब यहाँ वकीलों की जरूरत महसूस होने लगी है ताकि नियमों की सही व्याख्या हो सके। जूली ने आरोप लगाया कि मंत्री आवास विहीन और होमलेस पॉलिसी के बीच अंतर को स्पष्ट करने में विफल रहे हैं। अंत में मंत्री ने जिला कलेक्टर से विस्तृत रिपोर्ट मंगवाने का आश्वासन दिया, हालांकि विपक्ष उनके जवाबों से असंतुष्ट ही रहा।

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