नमस्ते प्यारे पाठकों! दिवाली की धूम मची है चारों तरफ, पर राजस्थान के अंता विधानसभा क्षेत्र में तो लगता है सियासी पटाखे पहले ही फूटने लगे हैं। चुनाव का मौसम हो और कोई ज़ोरदार मसाला न मिले, ऐसा कैसे हो सकता है भला? इस बार अंता ने हमें वो मसाला दिया है, जिसे चखकर आप भी कहेंगे, 'वाह भई वाह, क्या खेल चल रहा है!'
अंता का अखाड़ा: दाल-रोटी और डकैत का तड़का!
चलिए, सबसे पहले बात करते हैं निर्दलीय नरेश मीणा की। भई, इस बार उन्हें टिकट नहीं मिला, और उनकी नाराज़गी ऐसी फूटी है कि कांग्रेस की नींद हराम हो गई है। नरेश मीणा ने तो सीधा आरोप जड़ दिया कि 'कुछ कांग्रेसी नेताओं के घर की दाल-रोटी प्रमोद जैन भाया के पैसों से चलती है!' सोचिए ज़रा, यह बयान कितना तीखा है! क्या वाकई हमारे नेताओं की सियासी भूख और घर की ज़रूरतें किसी एक के 'धन बल' से चलती हैं? नरेश मीणा ने तो प्रमोद जैन भाया को 'डकैत' तक कह डाला और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी नहीं बख्शा। उनकी मानें तो डोटासरा ने भाया को बचाने के लिए उनका टिकट काट दिया। है न कमाल की बात? अब आप ही बताइए, जब एक पार्टी के भीतर ही ऐसे आरोप लगें, तो बाहर की जनता क्या सोचेगी?
'मैं बेचारा' बनाम 'धन बल': अंता का अनोखा रण