एक तरफ आचार संहिता लग रही थी, दूसरी तरफ सचिवालय में कल रात से ही धड़ाधड़ कई खानों का आवंटन हो रहा था, तो कहीं ट्रांसफर हो रहे थे।
हद तो तब हो गई जब संवैधानिक संस्था लोक सेवा आयोग में मुख्यमंत्री गहलोत अपने ओएसडी सहित केसरी सिंह की सिफारिश करते है।
स्टाफ सलेक्षन बोर्ड के अंदर डॉ. संजय पोसवाल की सिफारिश करते हैं, मैं समझता हूं कि इस प्रकार का कृत्य इस बात को सिद्ध कर रहा है, कि सरकार के मुखिया ने यह महसूस कर लिया कि उनका जाना बिल्कुल तय है, और जाते-जाते वह अपने विष्वसनीय लोगों को पुरस्कृत करके चले जाएं।
नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि आज पीसीसी के चीफ प्रेस कांफ्रेंस करके संवैधानिक पद पर बैठे उपराष्ट्रपति के राजस्थान दौरे पर सवाल खड़े करते हैं।
मैं समझता हूं कि आपने पिछले चार दिनों के अंदर दर्जनों बोर्डों के गठन की बात सुनी होगी।
राजस्थान के अंदर जिस प्रकार से जातिगत जनगणना की बात की थी, लेकिन इनकी भावना नहीं थी, ‘‘थोथा चना बाजे घणा’’ की तर्ज पर कांग्रेस अनर्गल घोषणाओं के नाम पर जनता को गुमराह करती रही।
हम चुनाव आयोग से मांग करंेगे कि, जनता की गाढ़ी कमाई से 13 इस प्रकार की योजनाएं हैं जिसमें स्मार्टफोन और 7 करोड़ 16 लाख गारंटी कार्ड शामिल हैं इन सभी में मुख्यमंत्री गहलोत की फोटो है।
प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लग चुकी है, ये सभी फोटो किस प्रकार हटाए जाएं इस बारे में चुनाव आयुक्त को चिंता करनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत ने भाजपा की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंुधरा राजे के फोटो पर तब आपत्ति दर्ज कराई थी।
इन पांच सालों में प्रदेष कांग्रेस सरकार के संरक्षण में अधिकारियों ने लूट खसोट मचा रखी थी, उस लूट खसोट का अब अंत होगा, और हम सचिवालय पर अपनी निगाह बनाए रखेंगे।
राजस्थान आर्थिक आपातकाल की ओर बढ़ चुका है, बिना बजटीय प्रावधानो के थोथी योजनाओं का अब अंत होगा।
हम फिर से एक ऐसा राजस्थान बनाएंगे जिसमें सुशासन होगा, दहशतगर्दी का अंत होगा, बहनों की इज्जत सुरक्षित होगी, हम सब लोग मिलकर किसानों के साथ जो अन्याय हुआ है उसका प्रतिकार करेंगे।
जनता की अदालत में जाएंगे, ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले ही हथियार डाल दिए हैं, पिछले 2 दिनों से अपने चहेतों को पुरस्कृत करने के लिए सचिवालय में रातभर दनादन फाईलें चल रही है, मुख्यमंत्री गहलोत अपने कार्यकाल को अंतिम कार्यकाल मानते है।