इन सरकारी कार्मिकों पर आरजीएचएस में वित्तीय अनियमितताएं करने और पेंशनभोगियों व कर्मचारियों को अनुचित लाभ दिलाने का आरोप है।
पूर्व में भी हुई थी कार्रवाई
गौरतलब है कि 13 दिन पहले ही सरकार ने 28 स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को निलंबित किया था। इसके अतिरिक्त, 34 अस्पतालों और 431 फार्मा स्टोरों को अनुचित योजनाओं से हटा दिया गया था।
इनसे 40 करोड़ रुपये का जुर्माना भी वसूला गया था। यह कदम उसी कड़ी में अगला बड़ा फैसला है।
मुख्य सचिव ने मांगी रिपोर्ट
मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर प्रमुख सचिव से 8 बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इनमें अनुचित लाभ के घपले सबसे प्रमुख हैं। 5 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर्स के हजारों गड़बड़ बिल सरकार के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
जांच के अन्य बिंदु
फिलहाल, भुगतान रोककर चिन्हित किए गए डॉक्टरों को सरकारी सेवा से हटाने को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज, निजी कॉलेज व यूनिवर्सिटी में फीस संबंधी मुद्दों पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।
विभाग ने तीन माह में इस पर कोई निर्णय नहीं लिया था। मैन पावर भर्ती के टेंडरों में घपले, लंबित एनओसी, रिम्स और सेनेट्री नेपकिन आपूर्ति सहित कुल 8 बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की गई है।
34 अस्पतालों पर लगा जुर्माना
सरकार की जांच में 34 अस्पताल फर्जी तरीके से क्लेम उठाने के दोषी पाए गए हैं। उन्हें योजना से हटाते हुए निलंबित किया गया है।
इन अस्पतालों में एक ही सर्जरी का दोहरा क्लेम उठाना, अनावश्यक जांचें करना और कम दरों में उपलब्ध जांचों को उच्च दर के पैकेज में क्लेम करने जैसी अनियमितताएं सामने आई हैं। इनसे 36 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है।