बता दें कि लालचंद मुंड भी सरदारशहर सीट से बड़े नेता माने जाते रहे हैं। उन्होंने 2022 में हुए उपचुनाव में 47000 वोट लेकर सभी को अपनी ताकत का अहसास करा दिया था।
जब ऐसे दिग्गज नेता का साथ निर्दलीय प्रत्याशी राजकरण चौधरी को मिलेगा तो उनकी ताकत भी बढ़ना मुनासिब है।
ऐसे में अब इस सीट से भाजपा-कांग्रेस की का समीकरण बिगड़ना भी तय हो गया है।
यहीं नहीं, राजकरण चौधरी को भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नाराज नेताओं का भी समर्थन मिल रहा है। जिसके चलते उनकी स्थिति और भी मजबूत हो गई है और चौधरी भाजपा-कांग्रेस को चुनौती देने को तैयार हो चुके हैं।
राजकरण चौधरी वर्तमान में सरदारशहर नगर परिषद के सभापति भी हैं।
तो क्या त्रिकोणीय हो गया मुकाबला
आपको बता दें कि चूरू की सरदारशहर विधानसभा सीट को कांग्रेस का अभेदय दुर्ग माना जाता रहा है।
लेकिन इस बार सियासी समीकरण कुछ बदल गया है। कांग्रेस ने यहां से अपने मौजूदा विधायक अनिल शर्मा को ही फिर से टिकट दिया है।
इसके जवाब में भाजपा ने यहां से पूर्व सीएम वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के खास माने जाने वाले पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा को चुनाव मैदान में उतारा है।
इसी बीच आरएलपी प्रत्याशी लालचंद मुंड का नामांकन वापस लेकर निर्दलीय प्रत्याशी राजकरण चौधरी को समर्थन देना दोनों ही बड़ी पार्टियों के लिए और बड़ी मुसीबत बन गया है।
ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार सरदारशहर सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।