जब पायलट को गहलोत के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से रोका गया तो उन्होंने आलाकमान को अपने जवाब में कहा, आखिर उनको ही हर बार क्यों रोक दिया जाता है जबकि आलाकमान कभी गहलोत को कुछ नहीं कहता है।
सोनिया गांधी नहीं वसुंधरा राजे हैं गहलोत की नेता
आखिरकार सचिन पायलट ने मीडिया के सामने अपने मन की बात बोलते हुए कहा कि मैं भी प्रदेश का पूर्व डिप्टी सीएम और प्रदेशाध्यक्ष रह चुका हूं, लेकिन कभी पार्टी के विरूद्ध काम नहीं किया।
लेकिन सीएम अशोक गहलोत के धौलपुर में हुए भाषण को सुनकर ऐसा लगा कि उनकी नेता सोनिया गांधी नहीं है बल्कि उनकी नेता तो वसुंधरा राजे सिंधिया हैं।
उन्होंने कहा कि अब मुझे समझ आ रहा है कि मेरे चिट्ठियां लिखने के बावजूद राजे में हुए भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
इसके आगे पायलट ने कहा कि एक तरफ कहा जाता है कि सरकार को गिराने का काम बीजेपी कर रही थी और दूसरी तरफ कहा जाता है कि बचाने का काम वसुंधरा कर रही थी। उनके खुद के समझ में नहीं आ रहा कि वे कहना क्या चाहते हैं।
बोलने में क्या, मैं भी कुछ भी बोल सकता था
सीएम गहलोत द्वारा पायलट पर लगाए गए आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि उन्होंने मुझे बहुत कुछ कहा। कभी कोरोना, गद्दार, निकम्मा आदि और जो आरोप परसों लगाए गए वो मैं ढाई साल से सुन रहा था। बोलने का क्या है मैं भी कुछ भी बोल सकता था, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया और खुद पर संयम रखा।
पायलट यहीं चुप नहीं रहे। उन्होंने गहलोत के बयानों पर हमला बोलते हुए कहा कि, कांग्रेस के नेताओं को बदनाम करने का काम हो रहा है और भाजपा नेताओं का गुणगान हो रहा है।
ऐसे-ऐसे नेताओं पर आरोप मढे जा रहे हैं जो 30-40 साल से पार्टी के साथ है। हेमाराम चौधरी ने तो अपने अपने बेटे की याद में 22 करोड़ रुपए खर्च करके गरीब बच्चों के लिए हॉस्टल बनाया है।
पायलट ने कहा कि जो पैसे के दम पर राजनीति करते हैं उन्हें हर जगह पैसा दिखता है।
अजमेर से जयपुर पैदल मार्च
राजस्थान में विधान सभा चुनावों से पहले सचिन पायलट अपनी ही सरकारे खिलाफ बड़ा कदम भी उठाने जा रहे हैं।
11 मई से पायलट अजमेर से एक पैदल मार्च शुरू करने जा रहे हैं जो जयपुर तक आएगा। इस पैदल मार्च में पायलट जनता से रूबरू होंगे और प्रदेश में पेपर लीक, भ्रष्टाचार और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाएंगे।
पायलट का यह पैदल मार्च करीब 125 किलोमीटर लंबा होगा जिसमें 5 दिन का समय लगेगा।