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जालोर

मंत्री ओटाराम देवासी के नाम से यह पत्र किसने लिखा है

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 41

HIGHLIGHTS

  1. 1 फर्जी पत्र की जांच: यह पता लगाना कि पत्र वास्तव में किसने लिखा और ओटाराम देवासी के नाम और हस्ताक्षर का इस्तेमाल क्यों किया गया। घोटाले की निष्पक्ष जांच: घोटाले का पर्दाफाश करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर जांच को निष्पक्ष बनाया जाए। प्रशासनिक सुधार: ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जाए। सिरोही के शांतिनगर हाउसिंग सोसाइटी घोटाले और उससे जुड़े विवादों का समाधान न केवल प्रशासन की साख बचाने के लिए जरूरी है, बल्कि यह यह भी सुनिश्चित करेगा कि ईमानदार अधिकारियों को संरक्षण और घोटालेबाजों को सजा मिले।
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Otaram Dewasi Sign Letter ?

सिरोही | जिले में शांतिनगर हाउसिंग सोसाइटी के घोटाले के विवाद के बीच एक एक पत्र पर बात करन बनती है। सहकारिता मंत्री को मंत्री ओटाराम देवासी के एक पत्र को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि पार्ट तीन वाली न्यूज में उल्लेख किया था कि मंत्री देवासी ने इस तरह के किसी पत्र को लिखने से साफ इनकार किया है। जिससे अब यह लगता है कि मंत्री का नाम नाम और हस्ताक्षर फर्जी तरीके से कोई और इस्तेमाल कर रहा है। वह कौन है। कोई परिचित—रिश्तेदार या कोई और...!

फर्जी लैटरपेड का मामला भी आया था सामने

यह पहली बार नहीं है जब सिरोही जिले में किसी प्रभावशाली व्यक्ति के नाम का फर्जी इस्तेमाल सामने आया हो। भीनमाल के पूर्व विधायक और भाजपा नेता पूराराम चौधरी के लैटरपेड का फर्जी उपयोग करते हुए डीएलबी के एक अधिकारी के तबादले की कोशिश का मामला पहले ही उजागर हो चुका है। अब ओटाराम देवासी के नाम पर सहकारिता मंत्री को लिखे गए कथित पत्र ने एक दूसरा ही इशारा किया है।

क्या है घोटाले का मामला?

घोटाले का पर्दाफाश: शांतिनगर हाउसिंग सोसाइटी में लगभग 3 करोड़ रुपए का घोटाला सहकारी समितियों के निरीक्षक ऋषभ मरड़िया की जांच रिपोर्ट में उजागर हुआ।
जांचकर्ताओं पर कार्रवाई: इस घोटाले का पर्दाफाश करने वाले निरीक्षक का तबादला कर दिया गया। अब सहकारिता विभाग के अतिरिक्त सहायक प्रशासनिक अधिकारी लक्ष्मीकांत खत्री को एपीओ करने की प्रक्रिया चल रही है।
आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप: आरटीआई कार्यकर्ता जगदीश सैन का कहना है कि घोटालेबाजों को बचाने के लिए ईमानदार अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है।

ओटाराम देवासी का बयान

राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने इस पूरे मामले में अपनी अनभिज्ञता जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई डिजायर पत्र नहीं लिखा। जबकि यह पत्र आप खुद पढ़ सकते हैं। देवासी ने कहा था "जांच के बाद सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा।" हालांकि इस फर्जी हस्ताक्षर और लैटरपेड की जांच जरूरी लगती है। यदि यह फर्जी है तो। यदि ओटाराम देवासी का नाम और हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल हो रहा है, तो इसके पीछे कौन है? क्या राजनीतिक साजिश है? यह मामला किसी साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसमें घोटाले के आरोपों को भटकाने के लिए इस तरह की रणनीति अपनाई जा रही हो।

सिरोही में प्रशासन पर सवाल

शांतिनगर हाउसिंग सोसाइटी घोटाले और इस नए फर्जीवाड़े ने प्रशासन और राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घोटालेबाजों को संरक्षण: घोटाले का पर्दाफाश करने वाले अधिकारियों का तबादला और कार्रवाई की बजाय ईमानदार अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। प्रशासन की विश्वसनीयता: यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो सिरोही में प्रशासन और सहकारिता विभाग की साख को गहरा नुकसान हो सकता है।

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