सिरोही, 3 जुलाई।
जिला भाजपा द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में राज्यमंत्री ओटाराम देवासी, सांसद लुम्बाराम चौधरी व भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंड़ारी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस और आपातकाल (काला दिवस) की 50वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने ‘एक देश, एक निशान, एक प्रधान, एक संविधान’ का नारा दिया और धारा 370 हटाने की पहली आवाज भी डॉ. मुखर्जी ने ही उठाई थी। उन्होंने भारत के संविधान के तहत जम्मू-कश्मीर को पूर्ण और अभिन्न अंग मानते हुए, इसके लिए बलिदान तक देने का संकल्प लिया था।
भाजपा नेताओं ने 25 जून 1975 को लगे आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल के तहत हजारों विपक्षी नेताओं को जेलों में डाल दिया था और आम जनता पर अत्याचार किए गए। नसबंदी जैसे अमानवीय कृत्य भी किए गए। सिरोही जिले के कई मीसा बंदियों और लोकतंत्र सेनानियों को प्रताड़ना झेलनी पड़ी। राज्यमंत्री देवसी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आपातकाल के कलंक से कभी मुक्त नहीं हो सकती।
नेताओं ने आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी की सरकार ने भ्रष्टाचार के विरोध में हो रहे व्यापक जनआंदोलन से घबरा कर आपातकाल लागू किया। उन्होंने राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीनों तक लगातार आपातकाल लगाने की अनुमति ली। इस दौरान इंदिरा गांधी ने खुद को सर्वशक्तिमान घोषित कर लिया और कुछ करीबी नेताओं के साथ मिलकर ऐसे फैसले लिए जिनका भारत के समाज पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
स्वतंत्र भारत का सबसे काला दौर था आपातकाल : डॉ. भंड़ारी
भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंड़ारी ने कहा कि आपातकाल स्वतंत्र भारत का सबसे काला दौर था। इस समय में सरकार की मनमानी गिरफ्तारी, असहमति की आवाज को दबाना और प्रेस पर कठोर सेंसरशिप जैसी घटनाएं सामने आईं।