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सिरोही हाईवे पर बर्थडे पार्टी, राजनैतिक दबाव में पुलिस

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 43

राजस्थान (Rajasthan) के सिरोही (Sirohi) में सारणेश्वर पुलिया (Saraneshwar Bridge) के फोरलेन हाईवे (Four-lane Highway) पर एक जन्मदिन पार्टी (Birthday Party) मनाई गई, जिसमें आतिशबाजी (Fireworks) और हूटिंग (Hooting) की गई। राजनैतिक दबाव (Political Pressure) के चलते कोतवाली पुलिस (Kotwali Police) कोई कार्रवाई नहीं कर पाई, जिससे बड़े हादसे का खतरा बढ़ गया।

HIGHLIGHTS

  1. 1 सिरोही के सारणेश्वर पुलिया पर हाईवे पर मनाई गई जन्मदिन पार्टी। नियमों की अनदेखी करते हुए आतिशबाजी और हूटिंग की गई। राजनैतिक दबाव के चलते पुलिस को बिना कार्रवाई लौटना पड़ा। गैस और पेट्रोल टैंकरों की आवाजाही के कारण बड़े हादसे का खतरा।

सिरोही: राजस्थान (Rajasthan) के सिरोही (Sirohi) में सारणेश्वर पुलिया (Saraneshwar Bridge) के फोरलेन हाईवे (Four-lane Highway) पर एक जन्मदिन पार्टी (Birthday Party) मनाई गई, जिसमें आतिशबाजी (Fireworks) और हूटिंग (Hooting) की गई। राजनैतिक दबाव (Political Pressure) के चलते कोतवाली पुलिस (Kotwali Police) कोई कार्रवाई नहीं कर पाई, जिससे बड़े हादसे का खतरा बढ़ गया।

हाईवे पर बेपरवाह जश्न

इन दिनों राजस्थान के हाईवे पर हादसों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।

सरकार अस्थाई ढाबों को हटाने की कार्रवाई कर रही है, क्योंकि वे वाहन चालकों का ध्यान भटकाते हैं।

परंतु सिरोही के सारणेश्वर पुलिया पर एक अलग ही नजारा देखने को मिला।

फोरलेन हाईवे पर खुलेआम एक जन्मदिन पार्टी का आयोजन किया गया।

इस पार्टी में बिना किसी नियम-कायदे के जमकर आतिशबाजी की गई और हूटिंग भी होती रही।

पुलिस पर राजनैतिक दबाव

कोतवाली थाने की गश्त कर रही गाड़ी भी मौके पर पहुंची।

हालांकि, राजनैतिक एप्रोच के चलते पुलिस को कोई कार्रवाई करने से रोक दिया गया।

राजनैतिक दबाव के कारण कोतवाली पुलिस को वहां से बिना कार्रवाई किए ही रवाना होना पड़ा।

यह घटना हाईवे सुरक्षा के नियमों की घोर अवहेलना को दर्शाती है।

बड़े हादसे का खतरा

फोरलेन हाईवे पर अक्सर गैस और पेट्रोल से भरे टैंकर गुजरते रहते हैं।

ऐसी स्थिति में आतिशबाजी और लापरवाही से मनाया गया जश्न एक बड़े हादसे को न्योता दे सकता है।

सवाल उठता है कि यदि कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

क्या फोन पर बात करने वाले नेता इसकी जिम्मेदारी लेंगे या फिर थाने के डीओ पर गाज गिरेगी?

यह घटना सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।

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