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ज़िंदगानी

सिरोही: खनन परियोजना के विरोध में जनता का फूटा आक्रोश, नेताओं को घेरा

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 58

सिरोही (Sirohi) के पिण्डवाड़ा (Pindwara) क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के विरोध में जनता का आक्रोश फूट पड़ा। अजारी (Ajari) में भाजपा (BJP) के 'आत्मनिर्भर भारत' कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सांसद (MP), विधायक (MLA) और अन्य नेताओं का घेराव कर तीखे सवाल पूछे, नेताओं ने आश्वासन दिया।

HIGHLIGHTS

  1. 1 पिण्डवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना का विरोध। ग्रामीणों ने भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों का घेराव किया। जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर जनता में भारी आक्रोश। नेताओं ने मुख्यमंत्री से बात करने और परियोजना रद्द करवाने का आश्वासन दिया।
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पिण्डवाड़ा में खनन विरोधी जन आक्रोश

सिरोही: सिरोही (Sirohi) के पिण्डवाड़ा (Pindwara) में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना (Limestone Mining Project) के विरोध में जनता का आक्रोश फूटा, जहाँ भाजपा (BJP) नेताओं को घेरा गया और तीखे सवाल पूछे गए।

पिण्डवाड़ा में खनन परियोजना के खिलाफ जन आक्रोश

सिरोही जिले के पिण्डवाड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना को लेकर जनता का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है।

यह परियोजना स्थानीय निवासियों के जीवन और आजीविका पर गंभीर खतरा पैदा कर रही है, ऐसा ग्रामीणों का मानना है।

गुरुवार को अजारी स्थित मार्कण्डेश्वर धाम में आयोजित भाजपा के 'आत्मनिर्भर भारत' कार्यक्रम के दौरान, क्षेत्र की जनता ने अपने आक्रोश को व्यक्त करने का यह अवसर चुना।

वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा जैसी चार प्रमुख ग्राम पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण इस विरोध प्रदर्शन में एकजुट हुए।

इन ग्रामीणों ने भाजपा नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का घेराव करते हुए प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर तीखे और सीधे सवाल दागे।

उनकी मुख्य चिंताएं पर्यावरण, जल स्रोतों और कृषि भूमि पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों से संबंधित थीं।

जनप्रतिनिधियों की डेढ़ महीने की अनुपस्थिति पर जनता का सवाल

ग्रामीणों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड जयपुर द्वारा लगभग 800.9935 हेक्टेयर भूमि पर चूना पत्थर खनन परियोजना प्रस्तावित है।

इस बड़ी परियोजना के विरोध में क्षेत्र की जनता पिछले डेढ़ महीने से लगातार आंदोलनरत है और अपनी आवाज बुलंद कर रही है।

लेकिन इस लंबी अवधि के दौरान, कोई भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि जनता के बीच उनकी समस्याओं को सुनने नहीं पहुँचा, जिससे लोगों में भारी आक्रोश और निराशा व्याप्त है।

सुबह करीब 10 बजे से शाम 5 बजे तक सैकड़ों ग्रामीण अजारी में घांची समाज धर्मशाला के बाहर शांतिपूर्वक डटे रहे और अपना विरोध दर्ज कराया।

जनता के इस दृढ़ संकल्प के बाद, भाजपा नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल विधायक के साथ धरना स्थल पर पहुँचा।

प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीणों से वार्ता शुरू की और खनन परियोजना को निरस्त करवाने का आश्वासन दिया।

हालांकि, ग्रामीणों ने इस मौखिक आश्वासन पर पूरी तरह भरोसा नहीं जताया।

सांसद, विधायक और प्रधान से जनता के तल्ख सवाल

जैसे ही कार्यक्रम स्थल पर विधायक समाराम गरासिया, सांसद लुम्बाराम चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी और पिण्डवाड़ा प्रधान नितिन बंसल जैसे प्रमुख नेता पहुँचे, ग्रामीणों ने उन्हें तुरंत घेर लिया।

जनता ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और नेताओं से सीधे सवाल किए।

एक ग्रामीण ने पूछा, "जब जनता डेढ़ महीने से सड़क पर है और अपनी लड़ाई लड़ रही है, तो इतने दिन से हमारे चुने हुए नेता कहाँ थे?"

ग्रामीणों ने यह भी जानना चाहा कि "इस विवादास्पद खनन परियोजना को निरस्त करवाने के लिए सरकार और आप लोग क्या ठोस कदम उठा रहे हैं?"

क्षेत्र के नेताओं का जनता को सहयोग नहीं मिलने के पीछे क्या खास वजह रही है, यह सवाल भी नेताओं को असहज कर गया।

जनता के इन तल्ख और सीधे सवालों का जवाब देने में अधिकांश नेता असमर्थ दिखाई दिए।

पिण्डवाड़ा प्रधान नितिन बंसल तो बिना कोई स्पष्ट जवाब दिए ही कार्यक्रम स्थल से वापस लौट गए।

प्रधान द्वारा क्षेत्र की जनता द्वारा दिए गए ज्ञापन को एक तरफ रखने का मामला भी गरमाया, जिससे जनता प्रधान के प्रति जबरदस्त आक्रोशित और नाराज दिखी।

इसके अतिरिक्त, भाजपा जिला मंत्री पवन राठौड़ द्वारा कुछ दिन पूर्व वाटेरा गांव में ग्रामीणों की बैठक में 500 करोड़ रुपये "मुँह बंद करने" के लिए देने के कथित बयान पर भी भाजपा सिरोही जिलाध्यक्ष से तीखे सवाल-जवाब किए गए।

नेताओं का दाल-बाटी और आंदोलनरत जनता का बिस्किट

इस पूरे घटनाक्रम में क्षेत्र के भाजपा नेताओं की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल उठे।

एक तरफ, कार्यक्रम स्थल के भीतर नेताओं ने स्वादिष्ट दाल, बाटी और चूरमा जैसे व्यंजनों का आनंद लिया।

वहीं, दूसरी ओर, कार्यक्रम स्थल से करीब 300 मीटर दूर, आंदोलनरत ग्रामीण सैकड़ों की संख्या में बाहर बैठकर केवल बिस्किट खाकर अपना दिन गुजारते रहे।

यह दृश्य पूरे कार्यक्रम में चर्चा का विषय बन गया और इसने नेताओं के प्रति जनता के मन में कई और सवाल खड़े कर दिए।

नेताओं का मौखिक आश्वासन: 'सीएम से करेंगे बात', जनता का दृढ़ संकल्प

भाजपा जनप्रतिनिधियों ने अंततः ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।

उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री के समक्ष खनन परियोजना को निरस्त करवाने की मांग मजबूती से रखेंगे।

नेताओं ने संघर्ष समिति के सदस्यों की भी मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाने का आश्वासन दिया।

लेकिन जनता ने अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी कि जब तक उन्हें खनन परियोजना रद्द करने का कोई लिखित आदेश नहीं मिल जाता, उनका आंदोलन और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम के दौरान जैसे ही भाजपा नेताओं का काफिला पहुँचा, पूरा क्षेत्र "खनन परियोजना वापस लो" और "जनता की जमीन नहीं बिकने देंगे" जैसे नारों से गूंज उठा।

कई ग्रामीणों ने मंच के बाहर ही भाजपा नेताओं से सीधे सवाल-जवाब किए और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

कुछ स्थानों पर भाजपा नेताओं के विरुद्ध भी तीव्र नारेबाजी देखी गई, जो जनता के गहरे असंतोष को दर्शाती है।

वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा के ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यह खनन परियोजना उनके खेती-बाड़ी, सदियों पुराने जलस्रोत और पूरे पर्यावरण को पूरी तरह से नष्ट कर देगी।

ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस मामले में जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो उनका यह आंदोलन जिला मुख्यालय तक पहुँचाया जाएगा और और भी उग्र रूप ले सकता है।

जनता का एक ही अटल संकल्प है कि यह विनाशकारी खनन परियोजना हर हाल में रद्द होनी चाहिए।

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