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SMS हॉस्पिटल में रोबोट से दुर्लभ MALS का सफल ऑपरेशन, मरीज का 20 किलो वजन घटा

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 47

जयपुर (Jaipur) के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने 34 वर्षीय मरीज में दुर्लभ 'मिडियन आर्केट लिगामेंट सिंड्रोम' (MALS) का सफल रोबोटिक ऑपरेशन किया। इस बीमारी से मरीज का 20 किलो वजन कम हो गया था।

HIGHLIGHTS

  1. 1 जयपुर के SMS हॉस्पिटल में दुर्लभ 'मिडियन आर्केट लिगामेंट सिंड्रोम' (MALS) का सफल ऑपरेशन। 34 वर्षीय मरीज का वजन घटकर 20 किलो रह गया था। रोबोटिक सर्जरी की मदद से 2 घंटे में जटिल ऑपरेशन पूरा हुआ। यह बीमारी एक लाख में से किसी एक व्यक्ति को होती है।
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SMS हॉस्पिटल में दुर्लभ MALS का सफल ऑपरेशन

जयपुर:जयपुर (Jaipur) के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने 34 वर्षीय मरीज में दुर्लभ 'मिडियन आर्केट लिगामेंट सिंड्रोम' (MALS) का सफल रोबोटिक ऑपरेशन किया। इस बीमारी से मरीज का 20 किलो वजन कम हो गया था।

इस दुर्लभ बीमारी 'मिडियन आर्केट लिगामेंट सिंड्रोम' (MALS) में मरीज के पाचन तंत्र तक खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी (आर्टरी) 70 प्रतिशत तक ब्लॉक हो गई थी। इस गंभीर स्थिति के कारण मरीज का भोजन पाचन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था।

34 साल के इस मरीज का वजन घटकर मात्र 20 किलो रह गया था। डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी एक लाख लोगों में से किसी एक में ही मिलती है, जो इसे अत्यंत दुर्लभ बनाती है।

मरीज को भूख कम लगने, खाने के बाद पेट दर्द होने, घबराहट और पाचन में समस्या जैसी कई गंभीर शिकायतें आ रही थीं। उसकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी।

सात साल से जूझ रहा था मरीज, कई जगह नहीं हुई पहचान

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जरी डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. जीवन कांकरिया ने बताया कि सीकर निवासी यह युवक करीब सात साल से इस अज्ञात बीमारी से जूझ रहा था। उसे लगातार भूख कम लगती थी और थोड़ा-बहुत खाने के बाद भी पेट में तेज दर्द शुरू हो जाता था।

सीकर समेत अन्य शहरों में कई डॉक्टरों को दिखाने और विभिन्न जांचें करवाने के बावजूद उसकी बीमारी का सही पता नहीं चल पा रहा था। उसकी स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी।

पिछले छह महीनों में उसकी हालत और गंभीर हो गई, उसका वजन करीब 20 किलोग्राम कम हो गया। इस दौरान उसका हीमोग्लोबिन भी घटकर 5.8 पर आ गया था, जो चिंताजनक स्तर था।

सीटी एंजियोग्राफी ने किया दुर्लभ बीमारी का खुलासा

डॉक्टर कांकरिया ने बताया कि जब मरीज एसएमएस की ओपीडी में आया, तो यहां उसकी रूटीन ब्लड टेस्ट, सोनोग्राफी और अन्य सामान्य टेस्ट करवाए गए। हालांकि, इन शुरुआती जांचों से भी बीमारी का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया।

इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज की सीटी एंजियोग्राफी (CT Angiography) करवाने का फैसला किया। इस विशेष जांच ने ही बीमारी की जड़ तक पहुंचने में मदद की।

सीटी एंजियोग्राफी करवाने पर पता चला कि मरीज के पाचन तंत्र को खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी लगभग 70 प्रतिशत ब्लॉक थी। यह ब्लॉकेज धमनी के अंदर से नहीं था, बल्कि उसके ऊपर मौजूद एक मांसपेशी (मसल) के दबाव के कारण था, जिससे खून की सप्लाई बाधित हो रही थी।

रोबोटिक सर्जरी से दो घंटे में जटिल ऑपरेशन सफल

डॉक्टर कांकरिया ने बताया कि 17 नवंबर को मरीज का ऑपरेशन रोबोट के जरिए किया गया। इस आर्टरी के ऊपर मौजूद मांसपेशी बहुत अंदरूनी हिस्से में थी, जिसे केवल रोबोटिक तकनीक की मदद से ही सटीकता और सुरक्षा के साथ हटाया जा सकता था।

करीब दो घंटे चली इस जटिल सर्जरी में डॉक्टरों ने मुख्य धमनी पर दबाव डालने वाले उस मांसपेशी के टुकड़े को सफलतापूर्वक काटकर हटा दिया। इस प्रक्रिया से धमनी पर बना दबाव तुरंत खत्म हो गया और खून का प्रवाह सामान्य रूप से बहाल हो गया।

ऑपरेशन के दूसरे दिन मरीज को तरल आहार दिया गया और उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। ऑपरेशन के चौथे दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

करीब एक सप्ताह बाद मरीज को दोबारा बुलाया गया और उसकी सीटी एंजियोग्राफी करवाई गई, जिसमें धमनी पूरी तरह से सही पाई गई। यह ऑपरेशन मरीज के लिए एक नया जीवन लेकर आया है।

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