जयपुर | वैसे तो वन्दे भारत ट्रेन अपनी स्पीड की वजह से फेमस है। परन्तु यदि हम बसवा गांव पहुंचें तो पता चलता है कि यहां इस ट्रेन को अपनी गति धीमी करनी पड़ती है। वह भी तब जब इस ट्रेन में रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन भी बैठे हों। तो भी यह अपनी स्वाभाविक गति से नहीं चल सकती। यहां प्रत्येक ट्रेन को धीमा होना ही होता है। इसकी वजह बेहद खास है।
वजह ऐतिहासिक है। यह बसवा गांव स्थित राणा सांगा का चबूतरा है। यह वह ऐतिहासिक चबूतरा है जो राणा सांगा की अंतिम लीला स्थली कहा जाता है। राणा सांगा के निधन के बाद ही देश में मुगल साम्राज्य स्थापित हुआ था। इसी वजह से इस चबूतरे का ऐतिहासिक और लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ महत्व है।
ऐसे में इसे बचाने के लिए रेलमार्ग ही मोड़ा गया है। एक कर्व बनने केकारण यहां कोई भी ट्रेन हो उसकी गति धीमी करनी पड़ती है। जब हम राणा सांगा के चबूतरे पर पहुंचे तो यहां मिले कई लोग ये लोग महाराणा सांगा की जयंती की तैयारियां कर रहे थे।
यह आयोजन 14 अप्रैल को किया जाना है। इसमें बतौर मुख्य अतिथि मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के सदस्य और राणा सांगा के वंशज लक्ष्यराज सिंह शिरकत करेंगे। इस आयोजन की तैयारियों में ग्रामीण जुटे हुए हैं। यहां हमें मिले शक्ति सिंह बांदीकुई।