जयपुर | एसएमएस (SMS) सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भी फर्जी (Fake) तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का मामला सामने आया है। यहां जिन एनओसी (NOC) से ट्रांसप्लांट हुए, उनमें कमेटी सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। सदस्यों में उनका नाम लिखा, जो कमेटी (committee) में थे ही नहीं। ऑपरेशन करने वाले चिकित्सकों ने एनओसी (NOC) में अंकित इन नामों पर ध्यान ही नहीं दिया। इससे पूरी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रकरण के बाद यहां ट्रांसप्लांट (tansplant) नहीं हो रहे हैं।
फर्जी एनओसी (fake NOC) का मामला उजागर होने के बाद गठित सरकार की मॉनिटरिंग कमेटी (monitoring committee) ने एसएमएस (SMS) सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के इन मामलों पर गौर नहीं किया। बताया जा रहा है कि इसका रिकॉर्ड (Record) अब गायब है।
खुद चिकित्सा मंत्री (medical minister) गजेंद्र सिंह खींवसर ने एक दिन पहले ही कहा कि वर्ष 2020 के बाद कमेटी द्वारा एक भी एनओसी (NOC) जारी होने का रेकॉर्ड नहीं मिला है। इसके बाद इस मामले में गहनता से पड़ताल की, जिसमें करीब आधा दर्जन एनओसी (NOC) मिली हैं। ये एनओसी वर्ष 2023 में जारी की गई थीं। एनओसी के आधार पर ही एसएमएस (SMS) सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट (kidney transplant) किए गए।
जिनकी ओर से एनओसी जारी बताई, वे कमेटी में नहीं थे।
हैरानी की बात है कि ये एनओसी, प्राचार्य कार्यालय (Principal Office) में बैठक के बाद जारी होना बताया गया है। जबकि एनओसी पर प्राचार्य का नाम और हस्ताक्षर ही नहीं है। एनओसी में जिन सदस्यों के नाम हैं, वे वर्ष 2022-23 की राज्य स्तरीय कमेटी (state level committee) का हिस्सा भी नहीं थे। अधिनियम (Act) के अनुसार एनओसी जारी करने वाली कमेटी में दो एनजीओ (NGO) के सदस्य, सामाजिक सदस्य व राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भी सदस्य का होना आवश्यक था, लेकिन वो भी नहीं थे।