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राजनीति

ज्योति मिर्धा बनीं भाजपाई तो हनुमान बेनीवाल बोले- ईडी- सीबीआई के डर से बदलनी पड़ी पार्टी

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सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा को नागौर सीट पर मजबूत उम्मीदवार मिल गया है। जिससे वह राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) को जबरदस्त टक्कर देगी। सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी मार्चो खोलते हुए कहा है कि ज्योति मिर्धा से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। 

HIGHLIGHTS

  1. 1 सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा को नागौर सीट पर मजबूत उम्मीदवार मिल गया है। जिससे वह राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) को जबरदस्त टक्कर देगी। सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी मार्चो खोलते हुए कहा है कि ज्योति मिर्धा से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। 
when jyoti mirdha joined bjp hanuman beniwal said had to change party due to fear of ed and cbi
Hanuman Beniwal

जयपुर | कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा की पोती और पूर्व कांग्रेस सांसद ज्योति मिर्धा (Jyoti Mirdha) के भाजपा में शामिल होने के बाद से सियासी जंग छिड गई है। 

जहां सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा को नागौर सीट पर मजबूत उम्मीदवार मिल गया है। जिससे वह राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) को जबरदस्त टक्कर देगी। 

वहीं दूसरी ओर, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी मार्चो खोलते हुए कहा है कि ज्योति मिर्धा के भाजपा में आने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। 

उनको दो बार चुनाव हरा चुके हैं। एक बार तो जमानत ही जब्त करावा दी थी। आपको बता दें कि छात्रसंघ चुनाव पर रोक के चलते के बेनीवाल प्रदेश के दौरे पर छात्रों के साथ आंदोलन पर हैं।

ईडी और सीबीआई के डर से बदलनी पड़ी पार्टी

सोमवार को अलवर में सांसद बेनीवाल ने ज्योति मिर्धा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि  ज्योति मिर्धा को ईडी और सीबीआई के डर से पार्टी बदलने को मजबूर होना पड़ा है। 

उनकी इंडिया बुल कंपनी की जांच चल रही थी। 

बेनीवाल ने कहा कि ज्योति मिर्धा भाजपा में इसलिए शामिल हुई कि ससुराल पक्ष की जांच ईडी और सीबीआई में चल रही है। ससुराल जेल नहीं जाए इसलिए इन्होंने भाजपा का दामन थामा है।

इसी तरह से आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने अपने भरतपुर दौरे के दौरान भी ज्योति मिर्धा को निशाना बनाते हुए कहा कि मिर्धा परिवार लगाार 20 साल से हमसे हारा है।

ज्योति मिर्धा लोकसभा चुनाव में हारीं, मेरे छोटे भाई के सामने उनका चाचा हारा।

भले ही दूसरा चाचा लोगों के आगे हाथ जोड़ कर जीत गया हो, लेकिन इनका कोई राजनीतिक वजूद नहीं है। 

मिर्धा ने तो नागौर को बर्बाद किया है। नागौर में विकास ही नहीं करवाया गया।

नागौर के लोग मिर्धाओ को ढूंढ रहे हैं। कहां हैं वह दादाजी परदादाजी जिन्होंने नागौर को बर्वाद करके छोड़ दिया। न शिक्षा, न नहर, न उद्योग दिए। 

हम लोग आ गए इसलिए नागौर में पढ़ाई का माहौल हो गया। नौकरियां भी लगने लग गईं। सड़कें बनने लग गईं।

इन्होंने नागौर और पूरे राजस्थान को बर्बाद किया। यह बीजेपी में इसलिए शामिल हुए ससुराल पक्ष की जांच म्क् और ब्ठप् में चल रहीं हैं। ससुराल जेल नहीं जाए इसलिए इन्होंने बीजेपी का दामन थामा है।

गौरतलब है कि ज्योति मिर्धा ने कांग्रेस का हाथ छोड़ सोमवार को भाजपा का दामन थामा है। उन्होंने दिल्ली बीजेपी मुख्यालय में बीजेपी जॉइन की है। 

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