इसी वजह से फिल्म निर्माता, संवाद लेखक को नोटिस जारी किया गया है।
इसी के साथ CBFC से यह बताने को कहा गया है कि रिलीज की अनुमति देने से पहले क्या कदम उठाए गए थे?
ऐसे में न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की बेंच ने कुलदीप तिवारी व नवीन धवन की याचिकाओं पर मुंतशिर को नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया है।
आज हुई सुनवाई में अदालत ने फटकार लगाते हुए सेंसर बोर्ड की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से सवाल करते हुए कहा कि आपत्तिजनक दृश्यों, कपड़ों और डायलॉग्स के बारे में क्या किया जा रहा है?
अगर हम लोग इस पर भी आंख बंद कर लें, क्योंकि ये कहा जाता है कि ये धर्म के लोग बड़े ही सहिष्णु हैं तो क्या उसका टेस्ट लिया जाएगा?
क्या यह सहनशीलता की परीक्षा है? यह कोई प्रोपेगेंडा के तहत की गई याचिका नहीं है।
क्या सेंसर बोर्ड ने अपनी जिम्मेदारी निभाई? ये तो अच्छा है कि ये उस धर्म के बारे में है, जिसे लोगों ने कोई पब्लिक ऑर्डर का प्रॉब्लम क्रिएट नहीं किया।
न्यायालय ने अब इस मामले को बुधवार को यानि कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
इसी के साथ ही न्यायालय ने केंद्र सरकार व सेंसर बोर्ड से मामले में निर्देश प्राप्त कर, कोर्ट को अवगत कराने का आदेश डिप्टी सॉलिसिटर जनरल एसबी पांडेय को दिया है।