जयपुर | अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और वास्तुकला के चमत्कारों के लिए जाना जाने वाला जयपुर शहर वर्तमान में निर्माण क्षेत्र में भ्रष्टाचार स्थली बना हुआ है। जयपुर में बिल्डरों पर जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से सड़कों और सरकारी नालों सहित सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का मामला उजागर हो गया है।
भ्रष्टाचार की बेल यहां से गुजर रही है: अरबों का घोटाला, जयपुर में सरकार जमीन तो छोड़िए बिल्डर नाला डकार गए, सीबीआई—ईडी से जांच की सिफारिश
सरकार के लिए जनता में विश्वास को बहाल करना और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि निर्माण उद्योग भविष्य की पीढ़ियों के लिए जयपुर की सांस्कृतिक विरासत और शहरी बुनियादी ढांचे को संरक्षित करते हुए कानून की सीमा के भीतर संचालित हो।
HIGHLIGHTS
- सरकार के लिए जनता में विश्वास को बहाल करना और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि निर्माण उद्योग भविष्य की पीढ़ियों के लिए जयपुर की सांस्कृतिक विरासत और शहरी बुनियादी ढांचे को संरक्षित करते हुए कानून की सीमा के भीतर संचालित हो।
- प्रथम दृष्टया जयपुर विकास प्राधिकरण के विधि निदेशक ने इसे 472 करोड़ का घोटाला आंका है।
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विधि निदेशक जेडीए ने पूरे मामले की जांच ईडी, सीबीआई अथवा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से करवाने की राय दी है। देखना यह है कि पूर्ववर्ती सरकारों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सत्ता में आई कांग्रेस यहां क्या कार्यवाही करती है।
जयपुर में ज्वैल्स आफ इंडिया और वर्ल्ड ट्रेड पार्क दो बड़े प्रोजेक्ट है, लेकिन यहां भ्रष्टाचार के आरोप सरकारी अफसरों की पोल खोलते हैं। प्रथम दृष्टया जयपुर विकास प्राधिकरण के विधि निदेशक ने इसे 472 करोड़ का घोटाला आंका है।
जेएलएन मार्ग की ग्रीन कॉरिडोर पर स्थित एक निर्माण परियोजना, ज्वेल ऑफ इंडिया में तो भूमि अधिग्रहण से लेकर भवन निर्माण के मामले में कई खेल उजागर हुए हैं। आपको जानकर हैरत होगी कि सरकारी नाले पर कब्जा करके न्यायालय के आदेशों का भी मखौल उड़ाया गया है।

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यहां तो पूरी प्रक्रिया ही अवैध गतिविधियों के आरोपों में है। विचाराधीन भूमि के स्वामित्व अधिकार, खसरा संख्या 182, विवादित हैं, इस बात पर चिंता जताई जा रही है कि जेडीए ने इस भूमि पर निर्माण की अनुमति कैसे दी। जेडीए अधिकारियों की चुप्पी और उनकी स्पष्ट निष्क्रियता अवैध निर्माण और आवंटन में उनकी संभावित मिलीभगत के बारे में संदेह गहराती है।
यही नहीं यहां एक—एक फ्लैट की कीमत तीन करोड़ से अधिक ही है। पूर्व मुख्य सचिव राजीव स्वरूप समेत कई अफसरों की यह आवास स्थली भी है। ऐसे में कई सवाल मौजूदा सरकार पर भी उठते हैं कि वह जांच क्यों नहीं करवाना चाहती है।
एक अन्य आरोप यह है कि एक बिल्डर जयपुर में वर्ल्ड ट्रेड पार्क (डब्ल्यूटीपी) के बीच स्थित सड़क का एक हिस्सा निगल लिया। सड़क के दोनों ओर दो भवनों को मर्ज कर व्यावसायिक दरों पर बेचने से भूमि अतिक्रमण का यह कृत्य मिलीभगत करने वाले दलों की संलिप्तता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
इस मामले से तो पता चलता है कि नियमों को लागू करने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की मिलीभगत के बिना ऐसी गतिविधियों को अंजाम नहीं दिया जा सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि डब्ल्यूटीपी से जुड़े व्यक्तियों में से एक को तो महत्वपूर्ण घोटालों में कथित संलिप्तता के लिए कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ा है।
जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई की मांग
इस मामले में मुख्यमंत्री, राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष, लोकायुक्त, और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक सहित कई अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज की गई। शिकायत में जेडीए अधिकारियों और खसरा नंबर 182 में सरकारी नाले पर अतिक्रमण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। इसकी जांच में जेडीए के डाइरेक्टर लॉ ने साफ तौर पर लिखा है कि यह एक बड़ा घोटाला है और जिम्मेदारों पर कार्यवाही के लिए सीबीआई, ईडी अथवा एसीबी से जांच करवानी चाहिए।
इन पर है आरोप
जयपुरिया ट्रस्ट और ज्वैल्स आफ इंडिया आदि पर इस मामले में बड़े आरोप बन रहे हैं कि उन्होंने सरकारी भूमि पर ही बड़ा अतिक्रमण कर लिया।
सोशल मीडिया पर सामने आए दस्तावेज में तो यह कहा जा रहा है कि ट्रस्ट को पब्लिक ट्रस्ट के लिए बनाए गए कानून के अनुसार पंजीकृत तक नहीं किया गया है।
यही नहीं इसमें कोई सरकारी प्रतिनिधि ट्रस्ट की गतिविधियों पर ध्यान देने के लिए नहीं है। यही नहीं इस रिपोर्ट में कतिपय फाइलें गुम होने की बात कही जा रही है। इसमें मुकदमे दर्ज करवाने की मांग की गई है।
ऐसे हालातों में जयपुर के निर्माण क्षेत्र में अनियमितताओं, मिलीभगत और भूमि अतिक्रमण के आरोप पारदर्शिता, जवाबदेही और विनियमों के प्रवर्तन के बारे में गंभीर चिंता शुरू होती है। सड़कों को निगलने और सरकारी नालों पर कब्जे से जुड़ी वारदातों में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ गहन जांच और उचित कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।
सरकार के लिए जनता में विश्वास को बहाल करना और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि निर्माण उद्योग भविष्य की पीढ़ियों के लिए जयपुर की सांस्कृतिक विरासत और शहरी बुनियादी ढांचे को संरक्षित करते हुए कानून की सीमा के भीतर संचालित हो।
चिंता का माहौल
राजस्थान हाईकोर्ट ने पूरे देश के सामने अब्दुल रहमान बनाम स्टेट आफ राजस्थान मामले में जो नजीर पेश की है। उसके अनुसार यह निर्माण ध्वस्त होना चाहिए। ऐसे में यहां इन्वेस्ट कर रहे निवेशकों में चिंता का माहौल है।
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