शिवगंज | शिवगंज शहर में स्वच्छता अभियान की स्थिति वर्तमान में बेहद चिंताजनक बनी हुई है। नगरपालिका प्रशासन की भारी लापरवाही के कारण शहर की जीवनदायिनी जवाई नदी अब एक डंपिंग यार्ड में तब्दील हो चुकी है। शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल हो गई है। नगरपालिका द्वारा शहरभर से एकत्रित किए गए कचरे को जवाई नदी के किनारे डाला जा रहा है, जिससे न केवल नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है, बल्कि आसपास के वातावरण में भी जहर घुल रहा है।
शिवगंज: जवाई नदी बनी कचराघर: शिवगंज नगरपालिका की लापरवाही: जवाई नदी को बनाया डंपिंग यार्ड, खुले में कचरा जलाने से फैला जहरीला धुआं
शिवगंज में जवाई नदी के किनारे कचरा डंप करने और जलाने से पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। नगरपालिका की लापरवाही के कारण स्थानीय निवासी और राहगीर प्रदूषण का सामना कर रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- शिवगंज की जवाई नदी को नगरपालिका ने डंपिंग यार्ड में बदल दिया है।
- खुले ट्रैक्टरों में कचरा ढोने से सड़कों पर गंदगी और प्रदूषण फैल रहा है।
- नदी किनारे कचरा जलाने से जहरीला धुआं पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है।
- प्रशासक की नियुक्ति के बाद से शहर की सफाई व्यवस्था और अधिक खराब हुई।
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नदी किनारे कचरा जलाने से बढ़ा खतरा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगरपालिका न केवल नदी किनारे कचरा फेंक रही है, बल्कि उसे वहीं जलाया भी जा रहा है। इस कचरे के जलने से निकलने वाला जहरीला धुआं पूरे क्षेत्र में फैल रहा है, जिससे सांस लेना दूषित हो गया है। यह नदी दो जिलों की सीमाओं को जोड़ती है और क्षेत्र की महत्वपूर्ण जल स्रोत है। लेकिन नगरपालिका की इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत ने नदी के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया है। कचरा प्रबंधन के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
खुले ट्रैक्टरों से फैलता प्रदूषण
शहर के अस्थाई डंपिंग यार्ड से कचरे को ढोने के लिए खुले ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन ट्रैक्टरों पर तिरपाल तक नहीं ढका जाता, जिससे रास्ते भर कचरा सड़कों पर उड़ता रहता है। सड़कों पर फैलते इस कचरे के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। तेज हवा के साथ कचरा लोगों के घरों और दुकानों में घुस रहा है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
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प्रशासक राज में बिगड़ी व्यवस्था
शहरवासियों का कहना है कि जब से नगरपालिका में प्रशासक ने कार्यभार संभाला है, तब से सफाई व्यवस्था और भी ज्यादा चरमरा गई है। जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बीच शिवगंज की यह जमीनी हकीकत डराने वाली है। स्थानीय निवासियों ने कई बार शिकायत की है, लेकिन अधिकारी अपने एयर-कंडीशंड चैंबरों से बाहर निकलकर स्थिति का जायजा लेने की जहमत नहीं उठाते।
नेताओं और अधिकारियों की चुप्पी
हैरानी की बात यह है कि सत्ता पक्ष के नेता और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। प्रदूषण के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी बीमारी या आपदा का इंतजार कर रहा है? शिवगंज के लोग इस अव्यवस्थित सफाई व्यवस्था और बढ़ते प्रदूषण से जल्द से जल्द निजात चाहते हैं।
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