लेकिन उन्हें सरोगेसी नहीं चाहिए
सबसे अच्छी रचनाएं अभी लिखी नहीं गयीं। वे अब भी गर्भस्थ हैं। वे लड़ रही हैं बाहर आने की जंग। लेकिन उन्हें सरोगेसी (कोख की...
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सबसे अच्छी रचनाएं अभी लिखी नहीं गयीं। वे अब भी गर्भस्थ हैं। वे लड़ रही हैं बाहर आने की जंग। लेकिन उन्हें सरोगेसी (कोख की...
अरुण रंजन जैसा पत्रकार इस तकलीफदेह बीमारी में भला क्या सोचेगा? क्या सोच सकता है? वह सोच रहा होगा:इतने दीवाने कहां से मेर...
सरसों के फूलों से भर देता हूं आंचल यह पीलापन रखना याद लो ऐसी वेला के लिए तुम्हें देता हूं मौसम का पहला उन्माद।।
ग्रामीण अंचल में तीज का मतलब घेवर नहीं होता, तीज का मतलब होता है हींडा (झूला) । हींडा भी छोटे बच्चों वाला नहीं जो तनिक इ...
आज से पांच दस -साल पहले तक स्त्रियों में इतनी उत्सुकता थी कि बेचारी दुल्हन घूंघट उठा उठाकर हैरान हो जाती थी। इतने से भी...
हम उस अरुण रंजन से मिलने जा रहे जो बीमार हैं। जिन्हें लकवे का हमला झेलना पड़ा और जिनकी याददाश्त साथ नहीं दे रही। वह ठीक...
दरवाजा खुल चुका है। हम सीढ़ियां चढ़ रहे हैं। अरुण जी का कमरा बदल गया है। अब वह ऊपर के फ्लोर पर रहते हैं। उनकी गर्दन में...
जिस शुभ दृश्य को देखने के लिए सूर्य अपनी गति रोक दे वह घटना साधारण तो नहीं हो सकती। अयोध्या, तिस में भी में राम लला का ज...
क्षत्रिय जाति सदा से ही शक्ति की उपासक रही है। किंतु राजस्थान में पवित्र चारण कुल में जन्मीं शक्ति साधिकाएं भी शक्तिस्वर...
सर्दियों में इन क्यारों में खड़े पाणत्या की स्थिति क्या होती होगी और गर्मियों में कील्या की दशा की कल्पना सहज संभव नहीं।...
कल से एक खुशखबरी जिसने देश के प्रधानमंत्री से लेकर आम नागरिक तक को रोमांचित किया है और खासकर राजस्थान के लोगों की खुशी थ...
पटना में होंगे ढेर सारे परसादी लाल। इन तीन- चार महीनों में हम इतना तो जान गये हैं कि निश्चित तौर पर होंगे। अलग- अलग रूपो...