🏷️ neelu shekhawat
71 खबरें मिलीं
जय करणी किनियाणी
क्षत्रिय जाति सदा से ही शक्ति की उपासक रही है। किंतु राजस्थान में पवित्र चारण कुल में जन्मीं शक्ति साधिकाएं भी शक्तिस्वर...
शेखाटी का माळ और नाळ
सर्दियों में इन क्यारों में खड़े पाणत्या की स्थिति क्या होती होगी और गर्मियों में कील्या की दशा की कल्पना सहज संभव नहीं।...
इकतालिस वर्ष बाद खुशी से झूमा यह घुड़सवार
कल से एक खुशखबरी जिसने देश के प्रधानमंत्री से लेकर आम नागरिक तक को रोमांचित किया है और खासकर राजस्थान के लोगों की खुशी थ...
आप इंडिका को मानिए, हम महाभारत को मानेंगे
प्रिय इंडिया प्रेमियों! एक राजा हुए हमारे यहां, नाम था भरत। उन महाप्रतापी भरत का समस्त लोकों को गुंजायमान करने वाला विजय...
समन्वयी संस्कृति और राष्ट्रबोध
गंगा को परिभाषित कर पाना कठिन है,इसलिए नहीं कि वह गंगा है बल्कि इसलिए कि वह प्रवाहमती है। प्रवाह को कोई क्या नाम देगा? ब...
अवधूत कवि का आखरलोक
सोशल मीडिया के दौर से पूर्व तक लेखक और पाठक में पर्याप्त दूरी हुआ करती थी। पाठक लेखक को विभोर होकर पढ़ा करते थे। पाठक के...
हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता
इसी जहर के शिकार हुए अधिकांश राजे-रजवाड़े और एक बहुआयामी व्यक्तित्व जो न केवल योग्य प्रशासक थे अपितु जबरदस्त आत्मविश्वा...
अरुण देश की ओर
एक लड़की खुशी से अपने फोन में अपने मारवाड़ी प्रेमी का फोटो दिखाती है जिससे भविष्य में विवाह करना चाहती है। हमारा पडौ़सी...
जाओ ठाकुर! भूल जायेंगे..
राजपूत की रेखाएं बड़े रूखेपन से खींची गई है। उसके एक हाथ में तलवार तो दूजे हाथ में कस्सी-कुल्हाड़ी रही। युद्धकाल में तलव...
हंगामा क्यूं है बरपा...
कुशल शासन प्रबंधन पढ़ाना ही है तो राजपूताना का पढ़िए जहां के शासकों ने भीषण युद्धों में जन-धन की अनवरत हानि सहते हुए भी...
घी मूंगां में ही ढुळसी..
एक जमाना था जब इन पर तेजा, चिरजां और फागण बजते थे। हिंदी गीत-संगीत नहींवत् बजता है इनपर, कह लीजिए अघोषित बहिष्कार। लेकिन...
कद की कीरत...
लोकेंद्र सिंह जी अकसर गोठ में आते थे इसलिए उन्हें ज्यादा देखने-सुनने का मौका ही न मिल पाता क्योंकि अधिकांश राजपूत घरों...