🏷️ neelu shekhawat
71 खबरें मिलीं
काळ से रूबरू होते राजस्थान का 'काळजा' हैं ये फूल
एक और चीज जिसमें हमने फूल को जिंदा रखा वह है-'फूल्या'। वही फूल्या जो ज्वार और मक्की को तिड़काकर बनाए जाते हैं। वही फूल्...
बात तो रुखाळ दी अब खळो रुखाळबा जाऊं
ठाकर साब आपको याद है? काळे-धोळे मिंयों ने माड्याणी (जबरदस्ती) लड़ाई मांड ली। आपकी कालवी घोड़ी (काला तगरा) जिसके बिना आप...
हां तो बरात टोल्डे चालबा द् यो
इस लंबी अवधि ने जानियों (बारातियों) की स्मृति में विभ्रम उत्पन्न किया,जनेती गांव का नाम भूल गए। 'टोल्डो-टोल्डो' करते करत...
अगले जनम मोहे हिंदू न कीजे
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से जुड़े मामलों पर राजस्थान में प्रसिद्ध लेखक ब्लॉगर नीलू शेखावत की एक टिप्पणी
कुरजां मीठी हालो नीं...
हम कहते हैं कुरज हमारी 'धीवड़' है,कुछ दिन ससुराल जाकर लौट आती है। उंगली से नख न्यारे हो तो कुरजां हमसे न्यारी हो। कुरज ह...
शांत हूज्या
आखिर छोटे बेटों ने बड़े भाईसाब को मैसेज भेजा। भाईसाब माटसाब थे। मारवाड़ी उनको 'जमती' नहीं थी और हिंदी उनसे 'समती' नहीं थ...
पुस्तक समीक्षा : क्या कहती हो
माज़ी का दर्द और इश्क़ के अफ़साने शायर की कलम ,उसके गज़ल कहने के अन्दाज़ को बिल्कुल अलग, उम्दा और खास बना देते है। यह शे...
पहियों पर इश्क़
पहियों पर इश्क़ ▪️ आसान नहीं पहियों पर ज़िंदगी, पाना पेचकस थामे हाथ, और ग्रीस से सनी हथेलियों की, मिटने लगती हैं सारी रे...
ओल्ड लैंग साइन
पेशे से शिक्षिका! राजस्थान विश्वविद्यालय में रिसर्च कर रही हैं और लिखती हैं जन की बात मन की भाषा में। फेसबुक पर बौद्धिक...
पो खालड़ी को खो
राजस्थान में कड़ाके की सर्दी दांत किटकिटा देती है. जन जीवन पशुओं के हालात को बयां करती है कविता. राजस्थानी भाषा सौष्ठव क...
पट्टे की पूछ
सच पूछिए तो ये पट्टे वाले प्राणी कुत्ते जैसे लगते भी नहीं। कुत्तों की अपनी एक बिरादरी है पूरी ठसकदार और खानदानी। ठसक देख...