अलवर: अलवर (Alwar) की अंबिका सिंह (Ambika Singh) ने आरजेएस (RJS) परीक्षा में तीसरी रैंक हासिल कर नाम रोशन किया है। बेटी की सफलता से उत्साहित मां मंजू राठौड़ (Manju Rathore) पैरों में तकलीफ के बावजूद खुशी से झूम उठीं। पिता जय सिंह राठौड़ (Jai Singh Rathore) ने कहा, बेटी हमेशा मान बढ़ाती है।
Rajasthan: अलवर की अंबिका RJS में तीसरी रैंक पर, मां खुशी से नाच उठी
अलवर (Alwar) की अंबिका सिंह (Ambika Singh) ने आरजेएस (RJS) परीक्षा में तीसरी रैंक हासिल कर नाम रोशन किया है। बेटी की सफलता से उत्साहित मां मंजू राठौड़ (Manju Rathore) पैरों में तकलीफ के बावजूद खुशी से झूम उठीं। पिता जय सिंह राठौड़ (Jai Singh Rathore) ने कहा, बेटी हमेशा मान बढ़ाती है।
HIGHLIGHTS
- अंबिका सिंह ने आरजेएस परीक्षा में तीसरी रैंक हासिल की। बेटी की सफलता पर मां मंजू राठौड़ पैरों में तकलीफ के बावजूद खुशी से नाच उठीं। अंबिका ने बताया कि उन्होंने रोजाना 10-12 घंटे पढ़ाई की। इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट के अगले सीजेआई पर सवाल पूछा गया था।
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अलवर के स्कीम एक निवासी 25 वर्षीय अंबिका सिंह ने राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) परीक्षा के फाइनल रिजल्ट में पूरे राजस्थान में तीसरी रैंक प्राप्त कर अलवर जिले का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में जश्न का माहौल है।
बेटी की सफलता पर मां का अनूठा जश्न
अंबिका की मां मंजू राठौड़ ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि वे सालों से नहीं नाची थीं। लेकिन बेटी के जज बनने की खुशी में, पैरों में परेशानी होने के बावजूद, वे खूब नाचीं। यह क्षण उनके लिए बेहद भावुक और यादगार रहा।
पिता जय सिंह राठौड़ ने अपनी बेटी की प्रशंसा करते हुए कहा कि बेटियां हमेशा परिवार का मान बढ़ाती हैं। अंबिका ने भी अपने पिता के सपने को पूरा करने पर खुशी जाहिर की।
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न्यायिक सेवा का सपना और कड़ी मेहनत
अंबिका ने बताया कि उनके पिता ने ही उन्हें न्यायिक सेवा में जाने का सपना दिखाया था। इस सपने को साकार होते देख उन्हें बहुत खुशी मिल रही है। इस सफलता के लिए उन्होंने रोजाना 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई की।
यह सफलता उन्हें दूसरे प्रयास में मिली है। अंबिका ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार, गुरुजनों और दोस्तों को दिया।
अंबिका के घर में जश्न का माहौल
आरजेएस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन के बाद अंबिका के घर में जश्न का माहौल है। अंबिका ने अपनी मां को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी साझा की।
रिश्तेदारों ने भी अंबिका को माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर बधाई दी। घर पहुंचे सभी लोग अंबिका की सफलता पर बेहद प्रसन्न दिखे।
तीसरी रैंक की उम्मीद नहीं थी, पर सफलता का था विश्वास
अंबिका ने बताया कि उन्हें तीसरी रैंक आने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन उन्हें अपनी सफलता का पूरा विश्वास था। उन्होंने अपने पहले प्रयास में केवल 5 नंबर से सफलता चूक गई थी।
उस समय पदों की संख्या अधिक थी। इस बार पद कम होने के बावजूद तीसरी रैंक प्राप्त करने की खुशी उन्हें बहुत अधिक है।
इंटरव्यू में पूछे गए महत्वपूर्ण सवाल
अंबिका ने अपने इंटरव्यू के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनसे कोर्ट से संबंधित कई सवाल पूछे गए थे। इंटरव्यू पैनल ने उनसे मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के जज के बारे में भी पूछा।
इसके अतिरिक्त, उनसे यह भी पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट का अगला मुख्य न्यायाधीश (CJI) कौन बन सकता है। अंबिका ने इस सवाल का भी सही जवाब दिया था, जो बाद में सही साबित हुआ।
उनके इस जवाब को सुनकर इंटरव्यू लेने वाले प्रतिनिधि काफी प्रभावित और खुश हुए थे। अंबिका की गहन जानकारी और आत्मविश्वास ने उन्हें प्रभावित किया।
मां मंजू राठौड़ ने एक बार फिर अपनी खुशी दोहराते हुए कहा, "मैं बहुत खुश हूं। मेरी बेटी ने खूब पढ़ाई की है। वह दिन-रात मेहनत करती थी और उसे आज सफलता मिली है। इस खुशी में मैं भी पूरे परिवार के साथ नाचने लगी, हालांकि मेरे पैरों में बहुत अधिक दिक्कत रहती है।" अंबिका की यह कहानी कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
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