करौली | चंद्रयान-3 के चांद पर कदम रखते ही भारतवासियों में चांद पर जमीन खरीदने की होड़ सी मच गई है।
रक्षाबंधन का उपहार चंदा मामा: करौली में बहनों को भाई ने दिया चांद पर 2 एकड़ जमीन का तोहफा
रक्षाबंधन के मौके पर करौली के होली खिड़किया के रहने वाले तरुण ने अपनी दो बहनों सोनिया और प्रियंका अग्रवाल के लिए चांद पर लेक ऑफ हैपीनेस के पास 2 एकड़ जमीन खरीदकर गिफ्ट में दी है।
HIGHLIGHTS
- रक्षाबंधन के मौके पर करौली के होली खिड़किया के रहने वाले तरुण ने अपनी दो बहनों सोनिया और प्रियंका अग्रवाल के लिए चांद पर लेक ऑफ हैपीनेस के पास 2 एकड़ जमीन खरीदकर गिफ्ट में दी है।
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हर किसी का अब यही सपना है कि उनका भी चांद पर एक आशियाना हो।
इसी सपने को पूरा करने के लिए रक्षाबंधन पर एक भाई ने अपनी बहनों को ये प्यार भरी चंद्र सौगात दी है।
जी हां, एक भाई ने अपनी बहन को राखी के तोहफे के तौर पर चांद की जमीन खरीदकर दी है। बहनों को ये उपहार देने वाले राजस्थान में करौली जिले निवासी तरुण अग्रवाल हैं।
रक्षाबंधन के मौके पर करौली के होली खिड़किया के रहने वाले तरुण ने अपनी दो बहनों सोनिया और प्रियंका अग्रवाल के लिए चांद पर लेक ऑफ हैपीनेस के पास 2 एकड़ जमीन खरीदकर गिफ्ट में दी है।
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बताया जा रहा है कि चांद पर जमीन खरीदने का करौली जिले से यह पहला मामला है, जबकि राजस्थान का संभवतः चौथा मामला है।
बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं
धरती से चांद को निहारने वाली दोनों बहनों को जब भाई की ओर से चांद पर जमीन मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा
सोनिया और प्रियंका ने कहा कि चांद पर इंसान रह सकता है या नहीं, इसरो के वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने में जुटे हुए है।
लेकिन, चांद पर हमारी जमीन है, यह हमारे लिए हमेशा यादगार रहेगा।
रक्षाबंधन पर बहनों को ये नायाब तोहफा देने वाले भाई तरुण ने कहा कि वह इस बार रक्षाबंधन पर अपनी बहनों को कोई यादगार तोहफा देना चाहता था।
ऐसे में चंद्रयान-3 की सफलता के बाद उसके मन में आया कि चांद पर बहनों के लिए जमीन खरीदनी चाहिए, क्योंकि हमारे जिले में अभी तक किसी ने जमीन नहीं खरीदी है।
कैसे खरीदी चांद पर जमीन ?
तरुण ने बताया कि उसने अमेरिका स्थित इंटरनेशनल लूनर लैंड अथॉरिटी से चांद पर 2 एकड़ जमीन खरीदी है।
इसके लिए उसने करीब 150 डॉलर कीमत चुकाई है। जमीन खरीदने के लिए तरुण ने करीब डेढ़ साल पहले इंटरनेशनल लूनर लैंड अथॉरिटी को आवेदन किया था।
जिसमें रक्षाबंधन से पहले जमीन के पेपर देने के लिए कहा गया था। करीब डेढ़ माह कि प्रोसेस के बाद रक्षाबंधन से एक दिन पहले कंपनी ने जमीन का प्रमाण-पत्र व जमीन का नक्शा सौंपा है।
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