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राजनीति

कांग्रेस की जगह RLP को लगा झटका: अशोक गहलोत की जादुई चाल ने फेल किया आरएलपी का प्लान

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कांग्रेस बीकानेर में बड़ी सफलता हासिल करते हुए अपने बागी नेता अब्दुल मजीद खोखर (Abdul Majeed Khokhar) को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का प्रत्याशी बनकर चुनाव लड़ने से रोक दिया है। 

HIGHLIGHTS

  • कांग्रेस बीकानेर में बड़ी सफलता हासिल करते हुए अपने बागी नेता अब्दुल मजीद खोखर (Abdul Majeed Khokhar) को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का प्रत्याशी बनकर चुनाव लड़ने से रोक दिया है। 
congress leader abdul majeed khokhar rlp withdrawal nomination from contesting elections as a candidate
Ashok Gehlot - Hanuman Beniwal

बीकानेर | Rajasthan Election 2023: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को राजस्थान की राजनीति का जादूगर ऐसे ही नहीं कहा जाता।

आज एक बार फिर से सीएम गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने बीकानेर में सियासी कामयाबी पाई है। 

कांग्रेस बीकानेर में बड़ी सफलता हासिल करते हुए अपने बागी नेता अब्दुल मजीद खोखर (Abdul Majeed Khokhar) को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का प्रत्याशी बनकर चुनाव लड़ने से रोक दिया है। 

बीकानेर पश्चिम से कांग्रेस के बागी ने आज अपना नामांकन वापस ले लिया है। 

अब खोखर कांग्रेस सरकार के शिक्षा मंत्री डॉ बीडी कल्ला (DR. BD Kalla) को अपना समर्थन देंगे। 

बता दें कि लगातार 10वीं बार बीडी कल्ला को पार्टी ने टिकट दिया है जिससे खोखर से नाराज होकर बगावत पर उतर गए थे। 

दरअसल, बीकानेर से टिकट कटने से नाराज कांग्रेस के अब्दुल मजीद खोखर ने पार्टी से बगावत करते हुए नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की से समझौता कर उसके निशान पर चुनावी ताल ठोक दी थी। 

अब्दुल मजीद खोखर शहर कांग्रेस के पदाधिकारी रहे हैं और शिक्षा मंत्री डॉ बीडी कल्ला को टिकट मिलने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। 

क्षेत्र में उनका खासा प्रभाव रहा है। ऐसे में माना जा रहा था कि खोखर आरएलपी के साथ मिलकर कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन उससे पहले ही गहलोत की जादुई छड़ी घूम गई। 

कांग्रेस की जगह आरएलपी को लग गया झटका

आपको बता दें कि नागौर से सांसद और आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने राजस्थान विधानसभा चुनाव में 200 प्रत्याशियों को उतारने का दावा किया था।

हालांकि, आजाद समाज पार्टी के साथ गठबंधन के बावजूद भी आरएलपी 200 उम्मीदवार नहीं उतार पाई। 
आरएलपी ने सिर्फ 83 विधानासभा सीटों पर ही प्रत्याशियों को सिपाही बनाकर चुनावी रण में उतारा हैं।

इसी बीच कांग्रेस का एक मोहरा आरएलपी के हाथ लगा था, वो भी आज उनके हाथ से निकल गया। 

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