सिरोही | राजस्थान में दो महकमे आपस में भिड़ने वाले है। एक के मुखिया सीएम हैं और दूसरे के परसादीलाल मीणा। एक पुलिस विभाग है और दूसरा आबकारी! मामला सिरोही जिले का है।
असली पुलिस हम हैं रे बाबा!: आबकारी और राजस्थान पुलिस में मची है रार
सिरोही पुलिस ने आबकारी के अफसरों को चक्करघिन्नी बना रखा है अब पूरे आबकारी महकमे के अफसर राजस्थान पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है
HIGHLIGHTS
- सिरोही पुलिस ने आबकारी के अफसरों को चक्करघिन्नी बना रखा है
- अब पूरे आबकारी महकमे के अफसर राजस्थान पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है
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यह वही सिरोही है जहां के निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार भी है। यहां वैसे ही शराब बेचने वालों से सिरोही पुलिस का प्रेम इतना है कि दूसरे विभागों के सरकारी अफसर पिट भी जाएं तो कानों जूं नहीं रेंगती।
यहां अवैध शराब तस्करों से स्नेह के चलते एक एसपी को निलम्बित होना पड़ा था। वहीं मौजूदा पुलिस आबकारी विभाग के अफसरों के मामले में कार्यवाही की बजाय उस ठेकेदार के पक्ष में खामोश है, जिस पर राजकार्य में बाधा का प्रकरण दर्ज है।
अब पूरे आबकारी महकमे के अफसर राजस्थान पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है।
तो कहानी कुछ यूं है कि दारू का एक ठेकेदार है दिनेश कुमार । परिवार में अलग—अलग नाम से शराब के ठेके रहे और विभाग के करीब एक करोड़ रुपए बकाया रहे।
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दिसम्बर 2022 में जब बकाया तीस लाख की गारंटी लेने के लिए आबकारी निरीक्षक पोकरलाल नोटिस लेकर शिवगंज स्थित दिनेश कुमार सोनल की दुकान पर पहुंचे तो वहां उसका भाई सूरज कुमार मिला।
भाई को बुलाने के लिए कहा तो उसने अपने पिता दुर्गालाल को बुला लिया।
आबकारी निरीक्षक का कहना है कि दुर्गालाल ने वहां पहुंचकर उसके साथ अपशब्द कहते हुए धक्का—मुक्की की और राजकार्य में बाधा पहुंचाई तथा अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम में प्रकरण दर्ज करवाने की धमकी दी। बाद में एससी—एसटी एक्ट में केस दर्ज भी करवा दिया।
जब आबकारी उप निरीक्षक पोकरलाल ने पुलिस को राजकार्य में बाधा की रिपोर्ट तो अफसरों ने उसे टरका दिया। बाद में एक दिन हस्ताक्षर करने के बहाने पोकरलाल को बुलाया और गिरफ्तार कर लिया।
पोकरलाल का कहना है कि वह सरकार के जिम्मेदार पद पर हैं और उन्हें तथा उनके अधिकारियों को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई। थाना प्रभारी अचलदान ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
अब आबकारी अधिकारी पोकरलाल के लिए सिरोही के जिला आबकारी अधिकारी, राजस्थान आबकारी सेवा संघ भी लामबंद हुए हैं। यहां तक कि पोकरलाल ने जो रिपोर्ट दी वह पुलिस ने दर्ज करने के बजाय दफ्तर दराज कर दी।
ऐसे में आबकारी विभाग को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए न्यायालय का सहारा लेना पड़ा। ऐसे में मुख्यमंत्री के उन दावों की भी पोल खुलती है कि अब आसानी से एफआईआर दर्ज हो रही है। एसपी और अन्य अफसर भी उच्च अधिकारियों के मौखिक आदेशों का हवाला दे रहे हैं।
यह वही सिरोही जिले का शिवगंज है, जहां के निर्दलीय विधायक राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार है। सीमावर्ती गुजरात राज्य अवैध शराब की खपत में इस जिले की पुलिस की चांदी करता है।
सीमावर्ती इलाकों के सैकड़ों की आबादी वाले गांवों में करोड़ों की शराब बिकती है। पहले एक आईपीएस अधिकारी को यहां से बतौर एसपी इसी तरह की मिलीभगत के कारण सस्पेंड होना पड़ा था।
आबकारी विभाग के करीब चौदह सौ करोड़ रुपए इसी तरह से ठेकेदारों में बकाया है। ऐसे में वसूली में जुटे अफसरों के मॉरल डाउन करने की बात कहते हुए आबकारी संघ ने कार्य का बहिष्कार करने की चेतावनी जारी की है।
देखना है कि अपने मुखिया के दो विभागों में इस जूतमपैजार को रोकने के लिए सलाहकार क्या सलाह देते हैं।
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