सीकर | राजस्थान के सीकर जिले में स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय का छठा दीक्षांत समारोह शनिवार को उत्साह और उमंग के साथ संपन्न हुआ। इस गरिमामयी समारोह में प्रदेश के राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। राज्यपाल ने अपने संबोधन में न केवल युवाओं को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया, बल्कि व्यावहारिक जीवन में सफलता प्राप्त करने के कई महत्वपूर्ण मंत्र भी साझा किए। उन्होंने दीक्षांत समारोह को जीवन की एक नई शुरुआत करार दिया।
झटपट नौकरी तो जल्द शादी: राज्यपाल: शेखावाटी विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह: राज्यपाल बोले- झटपट नौकरी मिलेगी तो शादी के लिए जल्द मिल सकती है लड़की
सीकर में शेखावाटी विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने छात्रों को कौशल विकास और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि रोजगार मिलने से विवाह की राह भी आसान हो जाती है।
HIGHLIGHTS
- राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने शेखावाटी विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में 90 हजार विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं।
- समारोह में 39 मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और 3 विशिष्ट हस्तियों को मानद पीएचडी की उपाधि से नवाजा गया।
- राज्यपाल ने कहा कि यूपीएससी और आरपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता के लिए निरंतर मेहनत और कौशल विकास जरूरी है।
- इतिहास पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमें मुगलों के बजाय महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज का प्रेरक इतिहास पढ़ाया जाना चाहिए।
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नौकरी और विवाह पर राज्यपाल का रोचक बयान
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए एक दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि आज के समय में रोजगार प्राप्त करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि यदि युवाओं को झटपट नौकरी मिल जाती है, तो उनके लिए विवाह की राह भी आसान हो जाती है। उन्होंने कहा कि अच्छी नौकरी होने पर शादी के लिए लड़की भी जल्द मिल सकती है। राज्यपाल का यह बयान सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने छात्राओं की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बेटियां बेटों से आगे निकल रही हैं।
कौशल विकास और स्वरोजगार पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि केवल किताबी डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। आज के प्रतिस्पर्धी युग में व्यावहारिक कौशल (Practical Skills) होना अनिवार्य है। उन्होंने राजस्थान की समृद्ध कला और कौशल का उदाहरण देते हुए रणकपुर के जैन मंदिर का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस भव्य मंदिर के निर्माण में 64 साल का समय लगा था। यह उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि हमारे पूर्वजों के पास कितना अद्भुत कौशल था। युवाओं को भी अपनी रुचि के अनुसार किसी न किसी हुनर में माहिर होना चाहिए।
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प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरणा
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने युवाओं को यूपीएससी (UPSC) और आरपीएससी (RPSC) जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि ये परीक्षाएं अत्यंत कठिन होती हैं, लेकिन दृढ़ निश्चय और सही दिशा में मेहनत से इन्हें पार किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से हार न मानने की अपील की। राज्यपाल ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब हमारे युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे। उद्यमिता और स्वरोजगार पर उन्होंने विशेष बल दिया।
इतिहास और शिक्षा पद्धति पर तीखे सवाल
समारोह के दौरान राज्यपाल ने वर्तमान और पुरानी शिक्षा पद्धति पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत की गौरवशाली शिक्षा व्यवस्था को नष्ट कर दिया था। उन्होंने तक्षशिला और नालंदा जैसे महान विश्वविद्यालयों के विनाश का जिक्र किया। राज्यपाल ने कहा कि हमें मुगलों का इतिहास विस्तार से पढ़ाया गया, जो कि सही नहीं है। उन्होंने दुख जताया कि औरंगजेब और अकबर को महान बताया गया, जबकि महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे सच्चे नायकों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।
मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान
इस छठे दीक्षांत समारोह में कुल 90 हजार विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्रियां प्रदान की गईं। यह विश्वविद्यालय के इतिहास का एक बड़ा आंकड़ा है। शैक्षणिक सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 39 मेधावी छात्र-छात्राओं को राज्यपाल के हाथों स्वर्ण पदक (Gold Medal) प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उनके चेहरे पर सफलता की चमक साफ देखी जा सकती थी। इसके अतिरिक्त, समाज के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली तीन महान हस्तियों को पीएचडी की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके अनुभव और सेवा के लिए दिया गया।
शेखावाटी शिरोमणि और भूषण सम्मान
विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र की प्रतिभाओं को भी पुरस्कृत किया गया। तीन विशिष्ट व्यक्तियों को ‘शेखावाटी शिरोमणि’ सम्मान से नवाजा गया। वहीं, पांच अन्य विद्वानों को उनकी शैक्षणिक और सामाजिक सेवाओं के लिए ‘शेखावाटी भूषण’ सम्मान प्रदान किया गया। यह पहल स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए की गई है। समारोह में विश्वविद्यालय की कुलसचिव श्वेता यादव ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रेनू महलावत और डॉ. नीतू सिंह ने कुशलतापूर्वक किया।
नए केंद्रों का लोकार्पण
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में कई नई परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। उन्होंने मुख्य द्वार पर स्थित ‘प्रेरणा स्थल’ और ‘शौर्य की दीवार’ का लोकार्पण किया। इसके बाद, उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध केंद्र का उद्घाटन किया। यह केंद्र विद्यार्थियों को शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेगा। राज्यपाल ने परिसर में आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और स्थानीय कलाकारों की कलाकृति की सराहना की। इस दौरान विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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