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पति-पत्नी का एक चिता पर अंतिम संस्कार: पाली: सड़क हादसे में पति-पत्नी की मौत, एक चिता पर अंतिम संस्कार

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पाली (Pali) में सड़क हादसे में बलवंत सिंह रावत (Balwant Singh Rawat) और डाली देवी (Dali Devi) की मौत के बाद उनका एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। उनकी 14 साल की बेटी सुमित्रा (Sumitra) अस्पताल में भर्ती है और माता-पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाई।

HIGHLIGHTS

  • पाली में सड़क हादसे में पति-पत्नी की मौत। दोनों का एक ही चिता पर किया गया अंतिम संस्कार। 14 साल की बेटी अस्पताल में भर्ती, माता-पिता के अंतिम दर्शन नहीं कर पाई। बेटा सुरेंद्र सिंह ने दी माता-पिता को मुखाग्नि।
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पाली: पाली (Pali) में सड़क हादसे में बलवंत सिंह रावत (Balwant Singh Rawat) और डाली देवी (Dali Devi) की मौत के बाद उनका एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। उनकी 14 साल की बेटी सुमित्रा (Sumitra) अस्पताल में भर्ती है और माता-पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाई।

दर्दनाक सड़क हादसा और एक चिता पर अंतिम संस्कार

राजस्थान के पाली जिले में एक अत्यंत हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।

एक भीषण सड़क हादसे में पति-पत्नी की असामयिक मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनका एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।

यह दुखद घटना 28 अक्टूबर को खोखरा गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर घटित हुई थी।

पाली शहर के रावत नगर निवासी 45 वर्षीय बलवंत सिंह रावत और उनकी 40 वर्षीय पत्नी डाली देवी इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे का शिकार हुए।

पुलिस के अनुसार, अज्ञात वाहन की तेज टक्कर से बाइक सवार बलवंत सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।

उनकी पत्नी डाली देवी को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान 28 अक्टूबर की शाम को उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

इस हादसे ने पूरे परिवार और स्थानीय समुदाय को गहरे सदमे और दुख में डुबो दिया है।

दंपति के निधन से उनके घर में मातम पसर गया है और हर कोई इस अप्रत्याशित क्षति से आहत है।

अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही बेटी, माता-पिता की मौत से बेखबर

इस दुखद घटना का सबसे मार्मिक और पीड़ादायक पहलू यह है कि मृतक दंपति की 14 वर्षीय बेटी सुमित्रा अभी भी अस्पताल में भर्ती है।

वह अपने माता-पिता की मौत की खबर से पूरी तरह बेखबर है और जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है।

दुर्भाग्य से, गंभीर रूप से घायल होने के कारण वह अपने माता-पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाई, जो परिवार के लिए एक और बड़ा दुख है।

परिवार के सदस्य और रिश्तेदार इस मासूम बेटी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और उसके माता-पिता की मृत्यु का सदमा सहने की शक्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

यह स्थिति परिवार के लिए दोहरे दुख और मानसिक पीड़ा का कारण बनी हुई है, जहां एक तरफ माता-पिता को खोने का गम है और दूसरी तरफ बेटी की चिंता।

धार्मिक कार्यक्रम से लौटते समय काल का ग्रास बने दंपति

मृतक बलवंत सिंह रावत के भाई गुमानसिंह रावत ने बताया कि बलवंत सिंह अपनी पत्नी और बेटी के साथ 27 अक्टूबर को ब्यावर के पास स्थित अपने पैतृक गांव बदनोर गए थे।

वे वहां आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए गए थे और अगले दिन वापस लौट रहे थे।

28 अक्टूबर की सुबह तीनों बाइक से वापस पाली लौट रहे थे, तभी हाईवे पर खोखरा गांव के निकट एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।

यह भीषण दुर्घटना पलक झपकते ही एक हंसते-खेलते परिवार के लिए काल बन गई और खुशियों को मातम में बदल दिया।

पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बेटे ने नम आंखों से दी माता-पिता को मुखाग्नि

पुलिस ने पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद 29 अक्टूबर को पति-पत्नी के शव परिजनों को सौंप दिए।

पूरे शहर में गमगीन माहौल था, जब बुधवार को दोनों पति-पत्नी का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।

मृतक दंपति के बेटे सुरेंद्र सिंह ने नम आंखों से अपने माता-पिता को एक ही चिता पर मुखाग्नि दी।

यह हृदय विदारक दृश्य देखकर वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल शोक में डूब गया।

सुरेंद्र सिंह और उसकी पत्नी को अभी भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है कि उनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे और वे हमेशा के लिए उनसे बिछड़ गए हैं।

जीवन यापन का आधार थे दंपति, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

बलवंत सिंह और उनकी पत्नी डाली देवी साड़ी फॉल लगाने का काम करते थे, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।

यह उनका मुख्य व्यवसाय था और परिवार की आय का एकमात्र स्रोत भी था।

पाली में उनके घर पर उनका बेटा सुरेंद्र सिंह और उसकी पत्नी रहते थे, जो अब अपने माता-पिता के बिना अकेले रह गए हैं।

इस अप्रत्याशित हादसे ने परिवार के सामने न केवल भावनात्मक बल्कि आर्थिक रूप से भी गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और उन्हें इस मुश्किल घड़ी में समाज और प्रशासन से हर संभव मदद की उम्मीद है।

यह घटना सड़क सुरक्षा के महत्व और लापरवाही से वाहन चलाने के गंभीर परिणामों की याद दिलाती है।

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