अंजुमन कमेटी के सेक्रेटरी सरवर चिश्ती के साथ ही रजा अकादमी मुंबई की ओर से फिल्म को लेकर विरोध जाहिर करते हुए दरगाह शरीफ की छवि खराब का करने आरोप लगाया गया है।
अजमेर दरगाह अंजुमन कमेटी के सेक्रेटरी सरवर चिश्ती ने बयान जारी करते हुए बताया कि इस तरह की फिल्में रिलीज का कलर आईज करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे धर्म को टारगेट करते हुए उसकी छवि खराब की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगी हुए कहा कि, इसमें एक ही समुदाय के लोग शामिल नहीं थे अलग अलग समुदाय के लोग शामिल थे जिसमें पार्टी के भी पदाधिकारी थे, लेकिन इसे दरगाह शरीफ से जोड़ा जा रहा है और चिश्ती फैमिली को निशाना बनाया जा रहा है यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दरअसल, ये फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है, जिसमें अजमेर के स्कूल और कॉलेज की सैकड़ों लड़कियों की जिंदगी खराब करने वाली घटना को दिखाया गया है।
इस फिल्म में अजमेर में सालों पहले 100 से ज्यादा युवा लड़कियों के साथ गैंगरेप और उन्हें ब्लैकमेल करने की कहानी बताई जा रही है।
जिन लड़कियों के साथ ये हैवानियत हुई उनको आज भी इंसाफ नहीं मिल पाया है। ये मामला आज भी कोर्ट में दर्ज है।
अब तो पीड़ित लड़कियों की उम्र भी 50 साल तक हो गई है, लेकिन उनको आज भी इंसाफ नहीं मिला है।
बता दें कि, इस मामले में साल 2018 में पुलिस ने मुख्य आरोपी को दर दबोचा था।
ये फिल्म उस सच्ची घटना पर आधारित बताई जा रही है। जिसमें अजमेर के इंग्लिश मीडियम स्कूल ’सोफिया’ में देश के कई बड़े आईएएस-आईपीएस से लेकर राजनेताओं की लड़कियां पढ़ती थी।
अपनी किशोरवस्था से ऊपर निकल चुकी 100 से भी ज्यादा लड़कियों की अश्लील फोटो खींचकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया।
इसके बाद शुरू हुआ गंदा खेल और लड़कियों को अश्लील फोटोज के दम पर फार्म हाउस में बुलाकर उनसे दुष्कर्म किया जाता रहा।
इस घिनौने कृत्य के तार अजमेर शरीफ के खादिम परिवार से जुड़े हुए बताए गए। इतना ही नहीं, इसमें राजनीतिक लोगों का भी नाम सामने आया।
अजमेर में सामने आई इस घृणित घटना में कुल 18 आरोपी घेरे में आए, जिनमें फोटो लैब का मालिक और टेक्निशियन भी शामिल रहा।
कई लड़कियों ने की थी आत्महत्या
जब इस खौफनाक और दरिंदगीभरी घटना का पर्दा फाश हुआ तो कई लड़कियों ने आत्महत्या भी कर ली थी।
बताया जाता है कि इस घटना को लेकर एक साथ 6-7 लड़कियों ने सुसाइड कर लिया था।