दरअसल, चवरली गांव के पोलिंग बूथ पर किसी भी मतदाता ने अपने मत का प्रयोग नहीं किया है।
यहां समस्त 890 मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार करते हुए वोट नहीं डाला है।
प्रशासनिक अधिकारी भी समझाइस में हुए विफल
सुबह से लेकर शाम तक बूथ पर एक भी मतदाता के नहीं पहुंने से मतदानकर्मी भी दिनभर फालतू बैठे रहे।
ऐसे में प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी ग्रामिणों से वोट डालने की बार-बार अपील और समझाइस करते रहे, लेकिन ग्रामीणों के साथ समझाइए नहीं कर पाए।
ग्रामीणों की मांग है कि उनके गांव चवरली को बसंतगढ़ ग्राम पंचायत में जोड़ा जाए तथा इसके अलावा हाईवे से आने वाले उनके गांव की तरफ वाले रास्ते पर एक सर्विस रोड भी बनाई जाए।
सर्विस रोड नहीं होने के कारण यहां पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें लोग मौत के शिकार भी हो चुके हैं।
जिला परिषद चुनाव का भी किया था बहिष्कार
गौरतलब है कि पूर्व में भी जिला परिषद चुनाव में चवरली गांव के मतदाताओं ने चुनाव का बहिष्कार किया था।
उसके बाद भी किसी भी पार्टी या प्रशासन ने ग्रामीणों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया।
ऐसे में ग्रामिणों का रोष और बढ़ गया और उन्होंने इस बार विधानसभा चुनाव में भी मतदान का बहिष्कार कर दिया।