इसमें अपनी तरह का पहला इंटीग्रेटेड ग्रास रूट रिफाइनरी कम पेट्रो-कैमिकल काॅम्पलेक्स स्थापित किया जा रहा है। वर्तमान में परियोजना में 4 युनिट्स एवं 7 पैकेजेज में 90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रिफाइनरी परियोजना से प्रदेश में औद्योगिक क्रांति की शुरूआत होगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। वर्तमान में लगभग 24 हजार प्रत्यक्ष एवं 35 हजार अप्रत्यक्ष लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि परियोजना से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 6 हजार करोड़ रूपए का राजस्व भी मिलेगा। साथ ही, राजस्थान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रमुख केन्द्र बनकर उभरेगा।
भजनलाल शर्मा ने एचपीसीएल को रिफाइनरी के लम्बित कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे यह शीघ्र संचालित हो और देश-प्रदेश को आवश्यकता अनुरूप तेल की सप्लाई सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में पेट्रोल व डीजल के अतिरिक्त 35 पेट्रो-कैमिकल व अन्य पदार्थों का उत्पादन होगा।
इन उत्पादों से बनने वाले पदार्थों की संख्या तीन गुना से अधिक हो सकती है। मुख्यमंत्री ने एचपीसीएल को इन उत्पादों की प्रभावी मार्केटिंग करने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी दिए। इससे रिफाइनरी शुरू होने से पहले ही इस क्षेत्र में इंडस्ट्रीज स्थापित हो सकेगी।
इससे पूर्व एचपीसीएल के प्रतिनिधियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना की प्रगति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इसमें बताया गया कि मूंदडा (गुजरात) से 487 किलोमीटर की क्रूड ऑयल की लाइन, नाचना (जैसलमेर) से 230 किलोमीटर की पानी की लाइन, मंगला (बाड़मेर) से 75 किलोमीटर की क्रूड ऑयल लाइन, बागोडा़ (जालौर) से 85 किलोमीटर की नैचुरल गैस की लाइन तथा पालनपुर (गुजरात) से 216 किलोमीटर की प्रोडक्ट्स लाइन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है।
बैठक में मुख्य सचिव सुधांश पंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त अखिल अरोरा, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा आलोक, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल, प्रमुख शासन सचिव उद्योग अजिताभ शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव आलोक गुप्ता, खान एवं पेट्रोलियम सचिव श्रीमती आनंदी, खान एवं भूविज्ञान निदेशक भगवती प्रसाद कलाल, एचपीसीएल के सीएमडी पुष्प जोशी एवं एचआरआरएल के सीईओ कमलाकर विखर सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।