चित्रा सिंह का चले जाना मारवाड़, खासकर के मालाणी में एक राजनीतिक सूनापन छोड़ देता है।
'कमल का फूल हमारी भूल' का नारा गुंजाकर चित्रा सिंह ने जब हुंकार भरी तो तत्कालीन सरकार की चूलें हिल गई थी। कहना गलत नहीं होगा राजस्थान की महिला नेताओं में यदि किसी ने वसुन्धरा राजे से टक्कर ली थी तो वह एकमात्र चित्रा सिंह ही रहीं।
चित्रा सिंह का चले जाना मालाणी और मारवाड़ के साथ—साथ हाड़ौती में भी दु:ख की खबर है।
उनकी पहचान सिर्फ पूर्व सांसद की पत्नी से नहीं की जानी चाहिए, बल्कि वे परिचायक थीं परम्पराओं के साथ चलते हुए राजनीति में एक अनूठी कोशिश करने वालों की।