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राजस्थान

जयपुर के चौमूं में पत्थरबाजी के बाद प्रशासन का बड़ा प्रहार, अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर

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राजस्थान के जयपुर ग्रामीण स्थित चौमूं में पत्थरबाजी की घटना के बाद प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण और मीट की दुकानों पर बुलडोजर चलाकर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है.

HIGHLIGHTS

  1. 1 चौमूं में पत्थरबाजी की घटना के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया. नगर परिषद ने अतिक्रमणकारियों को कार्रवाई से पहले तीन बार नोटिस जारी किए थे. अवैध मीट की दुकानों और सड़क सीमा में बने रैंप व सीढ़ियों को ध्वस्त किया गया. इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और आला अधिकारी सुरक्षा की निगरानी कर रहे हैं.
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चौमूं | राजस्थान के जयपुर ग्रामीण जिले में स्थित चौमूं कस्बे में पिछले दिनों हुई सांप्रदायिक तनाव और पत्थरबाजी की घटना के बाद अब प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. नगर परिषद चौमूं ने अवैध अतिक्रमणकारियों और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ व्यापक स्तर पर बुलडोजर कार्रवाई की शुरुआत कर दी है. इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शहर में कानून का इकबाल बुलंद करना और अवैध रूप से किए गए निर्माणों को हटाकर सड़क मार्ग को सुव्यवस्थित करना है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा.

नगर परिषद के अधिकारियों ने बताया कि यह बुलडोजर एक्शन अचानक नहीं लिया गया है बल्कि इसके लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है. संबंधित दुकानदारों और मकान मालिकों को कुल तीन बार नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने और अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया गया था. प्रशासन ने अंतिम समय सीमा 31 दिसंबर तय की थी लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी जब अतिक्रमण नहीं हटाए गए तो परिषद ने बल प्रयोग करने का निर्णय लिया. आयुक्त नगर परिषद के नेतृत्व में बुलडोजर दस्ते ने इलाके में प्रवेश किया और अवैध ढांचों को गिराना शुरू किया.

विवाद की पृष्ठभूमि और पत्थरबाजी

पूरे विवाद की जड़ 25 दिसंबर की रात को हुई वह घटना है जब बस स्टैंड क्षेत्र में मस्जिद के बाहर लोहे की रेलिंग लगाने को लेकर दो समुदाय आमने-सामने आ गए थे. इस दौरान हुई भारी पत्थरबाजी ने पूरे शहर में दहशत का माहौल बना दिया था. इस घटना के बाद से ही पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर थे और अब अवैध निर्माणों पर प्रहार करके शांति व्यवस्था को स्थायी रूप देने का प्रयास किया जा रहा है. प्रशासन ने इसे ऑपरेशन क्लीन का नाम दिया है जिसके तहत उन सभी अवैध रैंपों और सीढ़ियों को चिन्हित किया गया है जो मुख्य मार्ग में बाधा बन रहे थे.

अवैध मांस की दुकानों पर सख्त कार्रवाई

नगर परिषद की टीम ने विशेष रूप से उन मांस की दुकानों को निशाना बनाया है जो बिना लाइसेंस और बिना स्थान स्वीकृति के चल रही थीं. परिषद द्वारा जारी ताजा नोटिसों के अनुसार कुरेशी लियाकत अली जैसे कई संचालकों को चेतावनी दी गई है कि वे अपने अवैध निर्माण हटा लें. नोटिस में स्पष्ट लिखा गया है कि बिना स्वीकृति के अवैध मीट की दुकान संचालित करना और सड़क सीमा में निर्माण करना कानूनन अपराध है. यदि समय रहते इन्हें नहीं हटाया गया तो राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धाराओं के तहत दुकानें सीज कर दी जाएंगी और ध्वस्तीकरण का पूरा खर्च भी दुकानदारों से ही वसूला जाएगा.

पूर्व विधायक का बयान और प्रशासनिक समर्थन

चौमूं के पूर्व विधायक रामलाल शर्मा ने प्रशासन की इस कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि यह उन तत्वों के लिए एक कड़ा संदेश है जो शांति भंग करने की कोशिश करते हैं. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि पत्थरबाजी जैसी घटनाओं के बाद ऐसी कार्रवाई जरूरी हो जाती है ताकि समाज में यह संदेश जाए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. उन्होंने इस एक्शन को राजस्थान के अन्य हिस्सों के लिए भी एक उदाहरण बताया और कहा कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ ऐसी ही जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए.

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण

सुरक्षा की दृष्टि से पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके. डीसीपी वेस्ट हनुमान प्रसाद मीणा और एडिशनल डीसीपी राजेश गुप्ता स्वयं मौके पर मौजूद रहकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं. भारी संख्या में पुलिसकर्मी हेलमेट और सेफ्टी जैकेट पहनकर चप्पे-चप्पे पर नजर रखे हुए हैं. हालांकि कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने हाथ जोड़कर प्रशासन से मोहलत मांगी लेकिन नियमों के सख्त पालन के चलते दस्ते ने अपना काम जारी रखा. वर्तमान में पूरे विवादित क्षेत्र में सन्नाटा है और अधिकांश दुकानों पर ताले लटके हुए हैं.

शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने का संकल्प

प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है बल्कि शहर को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त करने तक जारी रहेगा. नगर परिषद की टीम उन सभी क्षेत्रों का सर्वे कर रही है जहां सड़क सीमा का उल्लंघन किया गया है. स्थानीय निवासियों से भी अपील की गई है कि वे स्वयं ही अपने अवैध निर्माण हटा लें अन्यथा परिषद द्वारा की जाने वाली कार्रवाई में होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी उनकी होगी. इस बुलडोजर एक्शन के बाद चौमूं में कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन की पकड़ और मजबूत होती दिखाई दे रही है.

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