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राजस्थान

दिगंबर नागराज पुरी महाराज ने ओंकारेश्वर से शुरू की नर्मदा परिक्रमा

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जोधपुर (Jodhpur) के औघड़नाथ आश्रम (Aughadnath Ashram) के श्रीदिगंबर नागराज पुरी महाराज (Shri Digambar Nagaraj Puri Maharaj) ने गुरुवार को ओंकारेश्वर (Omkareshwar) से नर्मदा परिक्रमा (Narmada Parikrama) यात्रा शुरू की। यह करीब 4000 किलोमीटर की यात्रा है जिसमें कई श्रद्धालु शामिल हैं।

HIGHLIGHTS

  1. 1 श्रीदिगंबर नागराज पुरी महाराज ने नर्मदा परिक्रमा शुरू की। यह यात्रा ओंकारेश्वर से प्रारंभ हुई और लगभग 4000 किलोमीटर की है। यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार और विश्व कल्याण है। महाराज पूर्व में भी कई पैदल यात्राएं पूरी कर चुके हैं।
digambar nagaraj puri maharaj started narmada parikrama from omkareshwar

Jaipur | जोधपुर (Jodhpur) के औघड़नाथ आश्रम (Aughadnath Ashram) के श्रीदिगंबर नागराज पुरी महाराज (Shri Digambar Nagaraj Puri Maharaj) ने गुरुवार को ओंकारेश्वर (Omkareshwar) से नर्मदा परिक्रमा (Narmada Parikrama) यात्रा शुरू की। यह करीब 4000 किलोमीटर की यात्रा है जिसमें कई श्रद्धालु शामिल हैं।

यह परिक्रमा यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि शारीरिक धीरज और दृढ़ संकल्प की एक असाधारण मिसाल भी है। करीब 4000 किलोमीटर की यह पैदल यात्रा किसी मैराथन से कम नहीं, जहां हर कदम आस्था और शारीरिक क्षमता का प्रमाण है। जोधपुर के औघड़नाथ आश्रम से जुड़े श्रीदिगंबर नागराज पुरी महाराज ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार, विश्व कल्याण और एकजुटता का संदेश लेकर यह लंबी दूरी की यात्रा प्रारंभ की है।

शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन

केशरसिंह ने बताया कि पंच दशनाम जूना अखाड़े के दिगंबर नागराज पुरी महाराज की यह यात्रा उनके अद्भुत शारीरिक धीरज को दर्शाती है। पूर्व में भी वे 55 दिनों में जगन्नाथपुरी और रामेश्वरम की यात्रा पूरी कर चुके हैं, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके अलावा, उन्होंने चारधाम और द्वारिका की भी पैदल यात्राएं की हैं। ये सभी यात्राएं उनके अदम्य साहस और शारीरिक फिटनेस का प्रतीक हैं, जो किसी भी एथलीट के लिए प्रेरणादायक हो सकती हैं।

आस्था और धीरज का संगम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नर्मदा परिक्रमा का विशेष महत्व है, जिसे पुराणों में बड़े सौभाग्य का कार्य बताया गया है। लेकिन इस यात्रा का शारीरिक पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसमें शामिल श्रद्धालु और स्वयं महाराज, भीषण गर्मी, ठंड और अन्य प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी यात्रा पूरी करते हैं। यह एक प्रकार का आध्यात्मिक खेल है, जहां मन और शरीर की सीमाओं को परखा जाता है। शहर के कई भक्त भी इस यात्रा में सेवाएं देने में जुटे हैं, जो टीम वर्क और सामुदायिक भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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