उन्होंने उत्पादन निगम को इसके अतिरिक्त आवंटित अन्य कोयला ब्लॉक (coal block) परसा तथा कैंते एक्सटेंशन से कोयले का खनन प्रारंभ करने में आ रही बाधाओं पर भी अधिकारियों से चर्चा की।
ऊर्जा मंत्री ने यहां खनन कार्य कर रहे श्रमिकों तथा उनके परिजनों से भी मुलाकात की। उन्होंने पीईकेबी (PEKB) माइंस एरिया में राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के माध्यम से कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सब्लिटी (CSR) कार्यों के तहत संचालित गतिविधियों की जानकारी ली।
उन्होंने गर्भवती महिलाओं को पोषण तथा छत्तीसगढ़ सरकार की किसी आईटीआई (ITI) को गोद लेकर इसके माध्यम से युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण प्रदान करने जैसी गतिविधियां भी संचालित करने के निर्देश दिए, जिससे कि स्थानीय श्रमिक परिवारों के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके और स्थानीय आदिवासी परिवारों में खनन गतिविधियों के प्रति विश्वास बढ़ सके।
नागर ने सघन पौधारोपण (planting) करने के भी निर्देश दिए जिससे कि पर्यावरण संरक्षण (Environment protection) को प्रोत्साहित किया जा सके।

उल्लेखनीय है कि आरवीयूएनएल का पीईकेबी (PEKB) कोयला ब्लॉक (coal block) सरगुजा में संगठित क्षेत्र में सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है, जो लगभग दस हजार लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्रदान करता है। इसने कोरबा, बिलासपुर और रायगढ़ जैसे अन्य जिलों में पलायन करने से स्थानीय श्रमिकों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नागर ने यहां पीकेसीएल (PKC L) के 9 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र तथा माइनिंग एरिया (mining area) में कोल के परिवहन एवं रिफिलिंग (Refilling) के लिए नवीनतम अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित डोजर पुश ऑपरेशन (dozer push operation) का उद्घाटन भी किया।
उन्होंने उस वन क्षेत्र का दौरा भी किया जहां बीते दशक में कोयला खनन के बाद पुनः प्राप्त भूमि पर उत्पादन निगम (production corporation) ने स्थानीय जन भागीदारी से 11.50 लाख पौधे लगाये हैं।