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भारत

10वीं-12वीं को लेकर CBSE का बड़ा फैसला

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सीबीएसई अब कक्षा 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में छात्र-छात्राओं को कोई डिवीजन और डिस्टिंक्शन नहीं देगा। सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने इस बात की घोषणा की है कि इन परीक्षाओं में सीबीएसई सिर्फ नंबर ही देगा।

HIGHLIGHTS

  1. 1 सीबीएसई अब कक्षा 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में छात्र-छात्राओं को कोई डिवीजन और डिस्टिंक्शन नहीं देगा। सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने इस बात की घोषणा की है कि इन परीक्षाओं में सीबीएसई सिर्फ नंबर ही देगा।
division will not be available in cbse board exam

नई दिल्ली | साल 2023 का आखिरी महीना दिसंबर लग चुका है और अगले महीने में नए साल की शुरूआत होने जा रही है। 
नए साल की शुरूआत के साथ ही स्टूडेंट्स की परीक्षाओं का सीजन भी शुरू हो जाएगा।

ऐसे में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं व 12वीं परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 

सीबीएसई अब कक्षा 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में छात्र-छात्राओं को कोई डिवीजन और डिस्टिंक्शन नहीं देगा।

सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने इस बात की घोषणा की है कि इन परीक्षाओं में सीबीएसई सिर्फ नंबर ही देगा।

सीबीएसई की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में कोई डिविजन या डिस्टिंक्शन नहीं देगा। 

इसमें अब कोई ओवरऑल डिवीजन, डिस्टिंक्शन या मार्क्स को एग्रीगेट यानी सभी विषयों में प्राप्त कुल मार्क्स का योग अंकित नहीं किया जाएगा। 

इसी के साथ इसमें ये भी कहा गया है कि छात्रों के अंकों की गणना के लिए सर्वाेत्तम 5 विषयों को तय करने का निर्णय पूरी तरह से एडमिशन देने वाले कॉलेज का होगा।

यदि किसी उम्मीदवार ने पांच से अधिक विषयों की पेशकश की है, तो सर्वाेत्तम पांच विषयों को निर्धारित करने का निर्णय प्रवेश देने वाली संस्था या नियोक्ता द्वारा लिया जा सकता है। 

अगर हायर एजुकेशन या रोजगार के लिए मार्क्स के प्रतिशत की  जरूरत है, तो इंस्टीट्यूट या नौकरी देने वाला खुद मार्क्स की गणना कर सकते हैं। 

बोर्ड अंकों के प्रतिशत की गणना, घोषणा या सूचना नहीं देता है।

इसलिए लिया गया ये फैसला

बोर्ड ने छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया है। स्टूडेंट्स और अभिभावकों में मार्क्स को लेकर मची होड़ और अनहेल्दी कॉम्पिटिशन से बचाने के लिए ये फैसला लिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले, सीबीएसई ने अनहेल्दी कॉम्पिटिशन से स्टूडेंट्स को बचाने के लिए मेरिट लिस्ट जारी करने की प्रथा को समाप्त किया था।

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