नामांकन दाखिल करने से पहले दिव्या जोधपुर सेंट्रल जेल भी पहुंची और जेल के बाहर से पुष्प अर्पित किए।

इस दौरान अपने सभी देवी देवताओं को ढोक लगाती हुई आगे बढ़ी दिव्या मदरेणा ने जनसभा को संबोधित भी किया।
सड़क से लेकर विधानसभा तक में शेरनी की तरह गरजने वाली विधायक दिव्या ने अपने बेबाक अंदाज में उन्होंने अपनी शादी को लेकर कहा कि, ‘लोग कहते हैं कि शादी कर लो, लेकिन मैंने कभी जवाब नहीं दिया, मैं आज जवाब देती हूं। मेरे हाथों में शादी की लकीरें नहीं, सेंट्रल जेल की लकीरें थीं।’
उन्होंने कहा कि, जरा सोचिए अगर पिता जेल की सलाखों में हो तो बेटी शादी कैसे कर ले।
उनकी एक-एक रात जेल में कैसे गुजरी होगी, ऐसे में बेटी को शादी करना शोभा नहीं देता है।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि मेरे भाग्य की लकीरों में सेंट्रल जेल थी। मैंने 10 साल वहां के फेरे किए हैं। पिता की सेवा करना ही मेरा कर्तव्य था।
अब सिर्फ एक ही काम है
इस दौरान दिव्या ने कहा कि अब मेरे पास सिर्फ एक ही काम है और वो ओसियां की जनता की सेवा करना है। मैं ओसियां की जनता के लिए हमेशा काम करती रहूंगी।
दिव्या ने विरोधियों पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि वो शेरनी की तरह चुनाव लड़ेंगी। कुछ लोग कहते हैं कि शेरनी को जंगल में भेज दो, वहां भूख-प्यास मिट जाएगी। शेरनी शेर के साथ ही रहती है।
दिव्या ने खुद पर तंज कसने वालों के खिलाफ बोलते हुए कहा कि उन लोगों की इन बातों पर हंसी आती है, लेकिन क्या वो ऐसी बातें अपनी बेटी के साथ भी करते हैं ? वो न भूखी हैं, न प्यासी हैं, वो तृप्त हैं।
दिव्या मदेरणा ने अपने कार्यकर्ताओं की टीम से कहा कि मुझे मेरे माता-पिता के बाद सबसे ज्यादा भरोसा आप पर है। मेरा एक-एक कार्यकर्ता कमांडर है। इनके लिए ही मुझे काम करना है।