जांच में पाया गया कि एयरलाइन के रोस्टर मैनेजमेंट और शेड्यूलिंग सिस्टम में गंभीर खामियां थीं। डीजीसीए के रिव्यू के अनुसार इंडिगो के क्रू का उपयोग निर्धारित मानकों की तुलना में केवल 55 प्रतिशत ही हो रहा था। जहां एक पायलट महीने में 100 घंटे की उड़ान भर सकता है वहां प्रबंधन की लापरवाही के कारण उनका सही इस्तेमाल नहीं हो पाया। इसी वजह से दिसंबर की शुरुआत में महज 10 दिनों के भीतर 5,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इससे देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
यात्रियों को राहत के लिए ट्रैवल वाउचर
फ्लाइट्स रद्द होने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था और उन्हें हवाई अड्डों पर घंटों इंतजार करना पड़ा। अब इंडिगो ने प्रभावित यात्रियों को मुआवजे के तौर पर 10,000 रुपये के ट्रैवल वाउचर देना शुरू कर दिया है। ये वाउचर अगले 12 महीनों तक वैध रहेंगे और इनका उपयोग एयरलाइन की किसी भी उड़ान के लिए किया जा सकेगा। यात्रियों को हुए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड के बाद यह एक सुधारात्मक कदम माना जा रहा है। एयरलाइन अपनी छवि सुधारने की कोशिश में जुटी है।
उच्च स्तरीय जांच पैनल की भूमिका
इस संकट की जांच के लिए गठित पैनल में डीजीसीए के डायरेक्टर जनरल संजय ब्रह्मणे, डिप्टी डायरेक्टर जनरल अमित गुप्ता, सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर कैप्टन कपिल मांगलिक और फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर कैप्टन रामपाल शामिल थे। पैनल ने उन सभी परिस्थितियों का बारीकी से विश्लेषण किया जिनकी वजह से हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी का माहौल बना था। रिपोर्ट की प्रतियां नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू और सचिव समीर कुमार सिन्हा को भी भेजी गई हैं। सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि तकनीकी और प्रबंधन स्तर पर ऐसी गलतियां दोबारा न दोहराई जाएं।
भविष्य की तैयारी और नियम
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह भी जांच की है कि क्या एयरलाइन की तैयारी नए नियमों को लेकर पर्याप्त थी। ऑपरेशन, ट्रेनिंग और छुट्टी की स्थिति को कवर करने के लिए हर प्लेन में पर्याप्त क्रू सेट होने चाहिए। इंडिगो ने इस पूरे संकट पर अपना पक्ष रखते हुए स्वीकार किया है कि असली दिक्कत पायलटों की शेड्यूलिंग और रोस्टरिंग में ही थी। मंत्रालय अब एयरलाइंस के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार कर रहा है ताकि यात्रियों के हितों की रक्षा की जा सके और विमानन क्षेत्र में विश्वास बना रहे।