ओवैसी ने बताया कि ईरान में इंटरनेट सेवाएं ठप्प होने के कारण अभिभावक बच्चों को टिकट नहीं भेज पा रहे हैं। कई छात्र गरीब परिवारों से हैं और उनके पास टिकट खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।
उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि विश्वविद्यालय छात्रों के पासपोर्ट वापस नहीं कर रहे हैं। इसके चलते छात्र चाहकर भी भारत लौटने में असमर्थ हैं और वहां फंसे हुए हैं।
सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह ईरानी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे को गंभीरता से उठाए। उन्होंने जमीनी स्तर पर त्वरित कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
उमर अब्दुल्ला का आश्वासन
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से फोन पर चर्चा की है। उन्होंने ईरान में जम्मू कश्मीर के छात्रों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं।
अब्दुल्ला ने बताया कि विदेश मंत्रालय ईरान के घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है। मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर इस बातचीत की जानकारी दी और सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि छात्रों के जीवन की रक्षा करना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय अब छात्रों की सुरक्षित निकासी के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। परिजनों ने भी सरकार से इस दिशा में तेजी से कार्रवाई करने की अपील की है।
भारतीय दूतावास भी ईरान में फंसे नागरिकों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति को देखते हुए और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।