जयपुर को बनाने में 8 प्रमुख द्वार, चौक, बाजार, गलियाँ और बड़े महल शामिल थे। इसे मुख्य रूप से संगमरमर और बलुआ पत्थर से बनाया गया, जिससे इसकी सुंदरता और भी बढ़ गई। जयपुर के निर्माण के साथ ही यह शहर व्यापार, संस्कृति, कला और राजनीति का प्रमुख केंद्र बन गया।

जयपुर स्थापना दिवस, शहर के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को याद करने का दिन है। इस दिन जयपुर के नागरिक और विभिन्न संगठन शहर के विकास, संस्कृति, और समृद्धि को लेकर अनेक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। यह दिन न केवल जयपुरवासियों के लिए बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व और खुशी का कारण होता है।

स्थापना दिवस के अवसर पर, जयपुर के विभिन्न किलों और महलों को सजाया जाता है, विशेष रूप से आमेर किला और सिटी पैलेस, जो शहर के ऐतिहासिक गौरव के प्रतीक हैं। इसके अलावा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य, और काव्य पाठ जैसे आयोजन होते हैं, जो शहर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हैं।
जयपुर का इतिहास बेहद रोचक और समृद्ध है। यहां के किलों और महलों में रॉयल परिवार की शाही जिंदगी की छाप मिलती है। सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित जयपुर न केवल वास्तुकला के मामले में उत्कृष्ट था, बल्कि यह प्राचीन भारतीय संस्कृति और विज्ञान का भी केंद्र बन गया।
जयपुर के प्रमुख आकर्षणों में हवा महल, जल महल, सिटी पैलेस, और जंतर मंतर शामिल हैं। इन स्थलों पर हर साल हजारों पर्यटक आते हैं। शहर के बाजारों में पारंपरिक हस्तशिल्प, रेशमी वस्त्र, आभूषण और राजस्थानी कला के अद्भुत सामान मिलते हैं। जयपुर का संगठित शहर-निर्माण, जो वास्तुशास्त्र और विज्ञान पर आधारित था, आज भी पूरी दुनिया में एक आदर्श के रूप में देखा जाता है।
वर्तमान समय में, जयपुर ने एक बड़े शहरी परिवर्तन को देखा है। यह शहर अब एक प्रमुख पर्यटन स्थल, व्यापारिक केंद्र और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यहां के प्रमुख उद्योगों में हस्तशिल्प, आर्ट, कपड़ा, और पर्यटन प्रमुख हैं। इसके साथ ही, जयपुर ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण विकास किया है।
स्थापना दिवस के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में शहर के विकास के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी को भी उजागर किया जाता है।