राष्ट्रीय पार्टी बनने पर उस पार्टी का चुनाव सिंह स्थाई हो जाता है, वह हमेशा के लिए उस पार्टी के नाम रिज़र्व हो जाता है, जैसे की आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय पार्टी बनने पर उसका चुनाव चिन्ह झाडू अब हमेशा के लिए उस पार्टी के नाम से रिजर्व हो गया है अब और कोई पार्टी इस चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़ सकती।
इसके अलाव राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के बाद उस पार्टी के उम्मीदवार बैलेट / ईवीएम के उम्मीदवारों के क्रम में ऊपर नजर आ सकेंगे। पार्टी को हर राज्य में फ्री में वोटर लिस्ट पाने का अधिकार होगा।
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के बाद वह पार्टी 20 से ज्यादा स्टार कैंपेनरों को अपनी लिस्ट में शामिल करती सकती है। यह संख्या बढ़कर 40 तक जाएगी।
राष्ट्रीय स्तर के चुनावों में आम लोगों को संबोधित करने के लिए रेडियो और टेलिविजन पर समय मिल सकता है। इसी के साथ राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के बाद पार्टी के अध्यक्ष सरकारी आवास पाने के पात्र होते हैं।
एक राष्ट्रीय पार्टी घोषित हो जाने पर उसको अपना पार्टी हेडक्वार्टर बनाने के लिए सरकारी जमीन मिलती है। और सबसे खास बात मान्यता प्राप्त राज्य या राष्ट्रीय पार्टी का नामांकन दाखिल करने के लिए सिर्फ एक प्रस्तावक की जरूरत होती है। तो इस तरह से आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय पार्टी घोषित हो जाने पर हम ये सभी सुविधाएं पार्टी को मिलेंगी।
भारत में राष्ट्रीय पार्टियों की संख्या कितनी है?
देश में अगर राष्ट्रीय पार्टियों की अगर बात करें तो, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय पार्टी घोषित किए जाने के बाद, अब देश में कुल 9 राजनीतिक दल हैं जिन्हें चुनाव आयोग ने मान्यता दी है उनमें, बीजेपी (BJP) , कांग्रेस (Congress), राष्ट्रीय जनता दल, टीएमसी, एनसीपी (NCP), सीपीआईएम (CPIM), सीपीएम, बीएसपी (BSP) और आम आदमी (Aam Adami Party) पार्टी शामिल है।
इनमें से अगर एनसीपी, टीएमसी, सीपीआई और बीएसपी की बात करें तो ये अभी तलवार की धार पर चल रही हैं क्योंकि, चुनाव आयोग ने इन सभी पार्टियों को नोटिस जारी कर रखा है और पूछा है कि इन पार्टियों को राष्ट्रीय दलों के रूप में मान्याता क्यों दी जाए? इसके जवाब में इन पार्टियों ने कहा कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव होने तक हमें छूट दी जाए और ये प्रक्रिया अभी लंबित है।
बतादें ममता बनर्जी वाली टीएमसी (TMC) के पास लोकसभा (Lok Sabha) सांसद तो पर्याप्त हैं लेकिन वो सभी पश्चिम बंगाल से हैं, एनसीपी अब महाराष्ट्र तक ही सीमित रह गई है। इसके अलावा सीपीएम (CPM) केरल या त्रिपुरा में ही एक्टिव है। तो वहीं सीपीआई किस्मत भरोसे बैठी है। अगर ये पार्टियां अपना दर्जा खो देती हैं तो ऐसे में आम आदमी पार्टी का रुतबा अलग ही नजर आएगा। खासतौर पर तब जब बीजेपी और कांग्रेस से लड़ने के लिए कोई तीसरा विकल्प खोजना होगा।