thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 🌺 ज़िंदगानी 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 💡 मनचाही ▶️ YouTube
बहते शब्द

पहियों पर इश्क़

नीलू शेखावत नीलू शेखावत 28

पहियों पर इश्क़ ▪️ आसान नहीं पहियों पर ज़िंदगी, पाना पेचकस थामे हाथ, और ग्रीस से सनी हथेलियों की, मिटने लगती हैं सारी रेखाएं, बच जाती है महज़ उमर रेख

HIGHLIGHTS

  1. 1 पहियों पर इश्क कैसा होता है
  2. 2 नीलू शेखावत की यह कविता
  3. 3 बाबा नागार्जुन की कविता चूड़ियां जैसा अहसास कराती है
neelu shekhawat kavita pahiyon par ishq
पहियों पर इश्क़

▪️ पहियों पर इश्क़ ▪️
आसान नहीं पहियों पर ज़िंदगी
पाना पेचकस थामे हाथ
और ग्रीस से सनी हथेलियों की
मिटने लगती हैं सारी रेखाएं
बच जाती है महज़ उमर रेख

शवासन करती सड़क पर
ब्रेक और एक्सीलेटर का
कुंभक रेचक करती बस
दृष्टि को लक्ष्य पर एकाग्र रखता चालक
ध्यान नहीं टूटता जिसका
भीड़ और कोलाहल में भी

नजर का किसी रोज पड़ जाना 
मिलना
टकराना
और लड़ जाना
लग जाना, लटकते नींबू मिर्च के वावजूद

आंख लगते ही उसकी
कम हो जाना गति का,
बढ़ जाना
घड़ी की ओर देखते ही
इश्क़ ही तो है

संबंधित खबरें

fasle poem by neelu shekhawat

फासले

poem on covid by neelu shekhawat

ओल्ड लैंग साइन

happy new year poem by neelu shekhawat

नव वर्ष शुभ हो

शीशे को दांए बांए घुमाकर
किसीको आंख भर निहारना
खुशबु से पहचानना 
हवाओं से बातें करना
एकतरफा ही सही
आसान है पहियों पर इश्क़

— नीलू शेखावत

शेयर करें: