फासले
नीलू शेखावत की एक रचना: दूर से चमकते चांद की उपमा कवि कुलगुरु से होती हुई अन्यान्य सौन्दर्य बिंबों में होती रही प्रतिफलित होती रहेगी दाग या गड्डे...
नीलू शेखावत की एक रचना: दूर से चमकते चांद की उपमा कवि कुलगुरु से होती हुई अन्यान्य सौन्दर्य बिंबों में होती रही प्रतिफलित होती रहेगी दाग या गड्डे...
पहियों पर इश्क़ ▪️ आसान नहीं पहियों पर ज़िंदगी, पाना पेचकस थामे हाथ, और ग्रीस से सनी हथेलियों की, मिटने लगती हैं सारी रे...
पेशे से शिक्षिका! राजस्थान विश्वविद्यालय में रिसर्च कर रही हैं और लिखती हैं जन की बात मन की भाषा में। फेसबुक पर बौद्धिक...
राजस्थान में कड़ाके की सर्दी दांत किटकिटा देती है. जन जीवन पशुओं के हालात को बयां करती है कविता. राजस्थानी भाषा सौष्ठव क...
तुम्हारा वर्तमान होना प्रसव पीड़ा और आज अतीत हो जाना उंगलियों से उर्मियों के फिसल जाने सदृश अन्तिम दिवस अपनी देहरी स...
बड़े बड़े घूघरों वाली जोड़ों को ठणमणाती वो अपने सिर पर लेकर चलती थी पूरा का पूरा शॉपिंग मॉल